कला शिक्षा का उद्देश्य रचनात्मक और उद्योगोन्मुख दृष्टिकोण विकसित करना है : डॉ. रश्मि गोरे

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कला शिक्षा का उद्देश्य रचनात्मक और उद्योगोन्मुख दृष्टिकोण विकसित करना है : डॉ. रश्मि गोरे


कानपुर, 12 जुलाई (हि.स.)। कला शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि रचनात्मक और उद्योगोन्मुख दृष्टिकोण विकसित करना भी है। यह बातें रविवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स के संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि गोरे ने तीन दिवसीय थिएटर कार्यशाला के समापन अवसर पर कहीं।

सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स के संगीत विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय थिएटर कार्यशाला का समापन हुआ। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ शहर के विभिन्न संस्थानों और स्वतंत्र रंगमंच समूहों से जुड़े युवा कलाकारों ने भाग लिया।

कार्यशाला में देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी तथा ठेर्रवाला के संस्थापक शिखर मिश्रा और प्रखर मिश्रा ने प्रतिभागियों को अभिनय, शारीरिक अभिव्यक्ति, समूह कार्य, मंच प्रस्तुति और समकालीन रंगमंच की व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। तीन दिनों तक चले सत्रों में प्रतिभागियों ने अभ्यास, रचनात्मक प्रयोग और सामूहिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पेशेवर रंगमंच की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।

विश्वविद्यालय ने इस अवसर पर जानकारी दी कि नए शैक्षणिक सत्र से पहली बार बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (बीपीए) – थिएटर पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। यह प्रैक्टिस-आधारित स्नातक कार्यक्रम अभिनय, निर्देशन, शरीर एवं स्वर प्रशिक्षण, नाट्यलेखन, रंगमंचीय तकनीक, डिज़ाइन और समकालीन थिएटर की विधाओं पर आधारित होगा, जिससे विद्यार्थियों को व्यावसायिक स्तर का प्रशिक्षण मिल सके।

पाठ्यक्रम का शैक्षणिक मार्गदर्शन सहायक प्राध्यापक आशीष आत्रेय और डॉ. सुन्दर पाल कर रहे हैं। दोनों शिक्षकों द्वारा थिएटर शिक्षा के विस्तार के साथ कार्यशालाओं, प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक सहयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

समापन अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि गोरे ने कहा कि वर्तमान समय में कला शिक्षा को केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, व्यावहारिक कौशल और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप दृष्टिकोण विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संगीत विभाग भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, जिससे विश्वविद्यालय कला शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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