टीईटी विवाद को लेकर शिक्षकों में बढ़ी चिंता, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

WhatsApp Channel Join Now
टीईटी विवाद को लेकर शिक्षकों में बढ़ी चिंता, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन


जौनपुर, 18 जून (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े विवाद और हालिया न्यायिक फैसलों को लेकर शिक्षकों में बढ़ती चिंता के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। महासंघ ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों की सुरक्षा की मांग उठाई।

महासंघ के संयोजक सत्येंद्र सिंह ने कहा कि एनसीटीई द्वारा 23 अगस्त 2010 को टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किए जाने तथा आरटीई एक्ट की धारा 23(2) में किए गए संशोधनों के बाद शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 और पुनर्विचार याचिकाओं पर 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद यह आशंका और गहरा गई है कि इसका प्रभाव वर्ष 2010 से पूर्व तथा 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था के अनुसार कोई भी नियम या नीति सामान्यतः लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में निर्धारित नियमों के तहत हुई नियुक्तियों पर बाद में बनाए गए पात्रता मानकों को लागू करना प्राकृतिक न्याय और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।महासंघ ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की कि 2010 से पहले और 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों को पूर्ण संरक्षण दिया जाए। संगठन का कहना है कि इन शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनके भविष्य को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता को दूर करने के लिए सरकार को आवश्यक नीतिगत कदम उठाने चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

Share this story