लेजर की मदद से तरल बूंदों की दिशा और गति नियंत्रित करने की तकनीक विकसित : डॉ. चैतन्य कुमार राव

WhatsApp Channel Join Now
लेजर की मदद से तरल बूंदों की दिशा और गति नियंत्रित करने की तकनीक विकसित : डॉ. चैतन्य कुमार राव


कानपुर, 11 मई (हि.स.)। यह शोध लेज़र और तरल पदार्थों के बीच होने वाली जटिल प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इससे दवा पहुंचाने की प्रणाली, जैव चिकित्सा उपकरणों और निर्माण तकनीकों में नए अवसर विकसित हो सकते हैं। यह बातें सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. डी. चैतन्य कुमार राव ने कहीं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के वैज्ञानिकों ने लेज़र की सहायता से तरल बूंदों की दिशा, गति और टूटने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने की नई तकनीक विकसित की है। यह शोध भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु तथा जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ ल्यूबेक के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया गया है।

अध्ययन में बताया गया कि लेज़र की ऊर्जा और फोकस को नियंत्रित कर सूक्ष्म तरल बूंदों को अलग-अलग दिशाओं में संचालित किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि लेज़र से बनने वाले शुरुआती प्लाज़्मा का असर बूंदों के आकार, उनकी गति और टूटने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

शोधकर्ताओं ने तेज गति से चित्र लेने वाली तकनीक, प्रकाशीय मॉडलिंग और बहुस्तरीय संख्यात्मक अनुकरण की सहायता से ऐसी प्रणाली तैयार की है, जिससे विभिन्न परिस्थितियों में बूंदों के व्यवहार का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह तकनीक इंकजेट प्रिंटिंग, दवा पहुंचाने की प्रणाली, जैव चिकित्सा उपकरणों और निर्माण तकनीकों में उपयोगी साबित हो सकती है।

यह शोध अमेरिका की प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है। शोध पत्र के लेखक अवनीश प्रताप सिंह, डॉ. डी. चैतन्य कुमार राव, माइक राहल्वेस, अल्फ्रेड वोगेल और सप्तर्षि बसु हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Share this story