शिक्षक एसोसिएशन ने लिखा पत्र,कुलपति चयन समिति में रखे जाएं अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि

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लखनऊ, 19 जून (हि.स.)। अनुसूचित जाति अनुसूचित जन जाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर विभिन्न समितियों में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों को चुनाव के माध्यम से भेजे जाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार की सबका साथ सबका विकास की स्पष्ट नीति है परन्तु कुछ आरक्षण विरोधी जातिवादी असामाजिक तत्व सरकार की मंशा के विरूद्ध कार्य करते हैं। इनके द्वारा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनुपयुक्त कह कर चयन ही नहीं किया जाता है।

एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. हरिओम ने पत्र में लिखा कि आज देश के विश्वविद्यालयों में आरक्षित वर्ग के कुलपतियों,निदेशकों और शिक्षकों का कोटा पूरा नहीं हो पाया है और उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। चयन समिति,पदोन्नति समिति,जांच समिति व अनुशासन समिति में कुलपति व निदेशक द्वारा आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि का नामांकन अपनी सुविधा के अनुसार किया जाता है। संस्थान प्रमुख द्वारा ऐसे प्रतिनिधि नामित किये जाते हैं जिनके विरूद्ध कोई जांच चल रही होती है। इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का हित होने के बजाय अहित हो जाता है। परिणामस्वरूप नाट फाउंड सूटेबल साक्षात्कार में आरक्षित वर्ग के पीड़ित अभ्यर्थी के ही विरूद्ध रिपोर्ट दी जाती है।

अनुसूचित जाति अनुसूचित जन जाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन ने मांग की है कि संघ लोक सेवा आयोग और राज्य सेवा आयोग में भी साक्षात्कार समिति व चयन समिति में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों को भेजा जाय। वहीं कुलपति, निदेशक व प्रधानाचार्य के चयन की समितियों में भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति व पिछड़ा वर्ग के सदस्य भेजे जाएं। इसके अलावा प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को एक यूनिट मानते हुए कुलपतियों,निदेशकों और प्रधानाचार्यों के पदों पर आरक्षण सुनिश्चित किया जाएं। एसोसिएशन ने उक्त मांग के संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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