“टीबी मुक्त भारत” के संकल्प को साकार करने में तेजी से आगे बढ़ रहा यूपी
लखनऊ, 05 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में संचालित 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ ने अपने 42 दिनों में उल्लेखनीय और प्रभावशाली प्रगति दर्ज करते हुए टीबी उन्मूलन की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से यह अभियान निरंतर गति पकड़ रहा है और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को व्यापक बना रहा है।
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने मंगलवार को अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री के “टीबी मुक्त भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक हैं।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के उच्च जोखिम वाले गांवों, शहरी वार्डों, झुग्गी-बस्तियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में ‘आयुष्मान आरोग्य शिविरों’ के माध्यम से सघन स्क्रीनिंग और जांच अभियान चलाया जा रहा है। इन 42 दिनों में अब तक 15,03,112 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
जांच सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के तहत प्रदेश में अब तक 10,17,992 एक्स-रे किए जा चुके हैं, जिनमें से 34,550 एक्स-रे केवल 04 मई को किए गए। प्रदेश में उपलब्ध 989 एक्स-रे मशीनों का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है और निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले लगभग 46 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की जा चुकी है। इसके साथ ही मॉलिक्यूलर जांच के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जहां 2,578 NAAT मशीनों के माध्यम से अब तक 2,76,446 जांच की गई हैं, जिनमें से 2,21,698 जांच प्रभावी रूप से दर्ज की गई हैं, जो लगभग 86.6 प्रतिशत उपयोगिता को दर्शाती है।
टीबी मरीजों की पहचान और उपचार के क्षेत्र में भी तेजी देखने को मिली है। अब तक 68,273 टीबी मरीजों की नोटिफिकेशन की गई है, जबकि 28,763 मरीजों का ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के लिए आकलन किया गया है, जो लगभग 42 प्रतिशत कवरेज को दर्शाता है। रोकथाम के तहत पात्र परिवार संपर्कों में से 1,24,633 की पहचान की गई, जिनमें से 72,285 को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट प्रदान किया गया है, जो लगभग 58 प्रतिशत उपलब्धि है।
समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए गए कि सभी जांच और स्क्रीनिंग से संबंधित डेटा को रियल-टाइम में ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड किया जाए, ताकि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
अपर मुख्य सचिव ने मण्डलायुक्तों, जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से आह्वान किया कि वे इस अभियान को जनआंदोलन का रूप दें और जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों तथा आम नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

