राजभर के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार, बोले- 'बीजेपी के तलवे चाटें, चूरा-चारा चाटें, उससे ज्यादा औकात नहीं'

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सिद्धार्थनगर। कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के तंज का अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखे शब्दों में जवाब दिया है। गविष्ठि यात्रा के 79वें दिन सिद्धार्थनगर में मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने राजभर पर व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजभर उनकी राजनीति को समझने की क्षमता नहीं रखते और भाजपा की चापलूसी में लगे हुए हैं।

'हमारी राजनीति इंद्र का पद भी दिला सकती है'
शंकराचार्य ने कहा कि राजभर जिस राजनीति की बात कर रहे हैं, वह बहुत छोटी राजनीति है। उन्होंने कहा, "राजभर जैसे लोग कुर्ता-पैजामा पहनकर जो राजनीति कर रहे हैं, वह बहुत छोटी है। हमारे जैसी राजनीति करने वाले को तो इंद्र का पद भी प्राप्त हो सकता है।"

'बीजेपी के तलवे चाटें, उतनी ही औकात है'
राजभर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा, "राजभर हमारी राजनीति नहीं समझेंगे। वे बीजेपी के तलवे चाटें और जो कुछ चूरा-चारा मिले, वही खाएं। उससे ज्यादा उनकी औकात नहीं है।"

'अपनी ही जाति को लजवा रहे हैं'
शंकराचार्य ने कहा कि ओमप्रकाश राजभर अपने समाज का सम्मान बढ़ाने के बजाय उसे शर्मिंदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "राजभर अपने ही जाति को लजवा रहे हैं। चुनाव आने दीजिए, सबका हिसाब लिया जाएगा।"

योगी आदित्यनाथ का भी किया जिक्र
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि राजभर को कुर्ता-पायजामा पहनाने का शौक है तो वे अपने नेता योगी आदित्यनाथ को पहनाएं। शंकराचार्य ने कहा, "योगी आदित्यनाथ की राजनीति इन्हें स्वीकार है, लेकिन शंकराचार्य के लिए ऐसी भाषा बोलते हैं।"

पहले राजभर ने साधा था निशाना
इससे पहले वाराणसी में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शंकराचार्य पर तंज कसते हुए कहा था कि यदि उन्हें राजनीति करनी है तो कुर्ता-पायजामा सिलवाकर गाड़ी पर समाजवादी पार्टी का झंडा लगा लें और खुलकर बैटिंग करें। राजभर ने यह भी कहा था कि शंकराचार्य का काम धर्म का प्रचार-प्रसार करना है, राजनीति में हस्तक्षेप करना नहीं।

बयानबाजी से गरमाई सियासत
राजभर और शंकराचार्य के बीच लगातार हो रही बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। दोनों नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर किए जा रहे तीखे हमलों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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