दक्षिण एशियाई आबादी में कोविड-19 की संवेदनशीलता यूरोप और चीन से अलग

दक्षिण एशियाई आबादी में कोविड-19 की संवेदनशीलता यूरोप और चीन से अलग
दक्षिण एशियाई आबादी में कोविड-19 की संवेदनशीलता यूरोप और चीन से अलग


—व्यापक आनुवंशिक अध्ययन,नेतृत्व बीएचयू के प्रोफेसर ने किया

वाराणसी,04 अप्रैल(हि.स.)। भारतीय उपमहाद्वीप की आबादी के बीच वैश्विक महामारी कोविड-19 की संवेदनशीलता में आनुवंशिक विविधताओं की भूमिका को समझने के उद्देश्य से व्यापक आनुवंशिक अध्ययन किया गया। इसमें फ्यूरिन जीन वेरिएंट और कोविड-19 मामले की मृत्यु दर के बीच महत्वपूर्ण संबंध उजागर हुआ। यह महत्वपूर्ण अध्ययन महामारी विज्ञान और आनुवंशिक कारकों में नई दिशा प्रदान करता है। इस अध्ययन का नेतृत्व बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने किया।

इस अध्ययन में विभिन्न भारतीय राज्यों के 450 नमूनों का आनुवांशिक विश्लेषण किया गया। इसके लिए टीम ने फ्यूरिन जीन के म्यूटेशन आरएस 1981458 और कोविड-19 गंभीरता के बीच एक उल्लेखनीय सकारात्मक संबंध की पहचान की है, जो भारत के विभिन्न जातीय समूहों पर वायरस के प्रभाव को जीन के आधार पर दर्शाता है। वैज्ञानिकों ने इस सम्बन्ध को देखने के लिए महामारी की पहली और दूसरी लहर की विभिन्न समय सीमाओं का अध्ययन किया, जो कोविड-19 में इस म्यूटेशन की संभावित भूमिका को बताता है।

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता रुद्र कुमार पांडेय ने बताया कि यह शोध कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अनुवांशिक आधार पर भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले लोगो में बीमारी की गंभीरता को कैसे प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि वे आबादी जिनमें ज्यादा गंभीर रूप से बीमार होने के आनुवांशिक लक्षण उनके लिए रणनीति विकसित करने के लिए इन आनुवंशिक कारकों को समझना महत्वपूर्ण है।' इस विषय पर एक कदम आगे बढ़ते हुए टीम ने कंप्यूटर मॉडल के हिसाब से दिखाया यह म्यूटेशन प्रतिरक्षा कोशिकाओ को कैसे संचालित करता है। इसके अलावा, भारतीय उपमहाद्वीप पर ध्यान केंद्रित करते हुए, टीम ने दुनिया भर के 393 लोगो का एनजीयस डेटा की जांच करते हुए, अनुसंधान को वैश्विक स्तर तक बढ़ाया।

इस वैश्विक विश्लेषण में विभिन्न कंप्यूटर एनालिसिस को इस्तेमाल करते हुए देखा गया की भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों के संवेदनशीलता यूरोप और चीन के लोगो से भिन्न है। जीन वैज्ञानिक प्रो.ज्ञानेश्वर चौबे के अनुसार,यह अध्ययन न केवल कोविड-19 संवेदनशीलता को समझने में आनुवंशिक कारकों के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि आनुवंशिक बायोमार्कर के रूप में इन म्यूटेशन का उपयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह शोध महामारी के दौरान नीतियों को विकसित करने, संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से आवंटित करने और, अंततः अमूल्य मानव जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/सियाराम

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