लखनऊ के 12 निजी अस्पतालों में 26 औषधि निरीक्षकों की टीम ने किया औचक निरीक्षण

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मरीजों को दवाओं की उचित कीमत पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूपीएफएसडीए की बड़ी कार्रवाई

दवाओं के क्रय मूल्य और मरीजों से वसूले जा रहे मूल्य में बड़े अंतर की जांच, 38 औषधियों के लिए गए नमूने

फार्मेसी में स्टॉक, बिलिंग, कोल्ड चेन, फार्मासिस्ट की उपलब्धता और दवाओं की गुणवत्ता समेत कई बिंदुओं पर हुई सघन जांच

लखनऊ, 02 अक्टूबर। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उचित दरों पर उपलब्ध कराने और अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद-बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश (यूपीएफएसडीए) का प्रदेशव्यापी विशेष अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में विभाग की टीमों ने 30 सितंबर से 01 अक्टूबर 2026 के बीच लखनऊ के 12 निजी अस्पतालों की फार्मेसियों का औचक निरीक्षण किया। इस अभियान में 26 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने अस्पतालों की फार्मेसियों में फार्मासिस्ट की उपलब्धता, मेडिकल ऑक्सीजन, जीवनरक्षक दवाओं के बिलिंग एवं स्टॉक रिकॉर्ड, कोल्ड-चेन मेंटेनेंस, भंडारण व्यवस्था, औषधियों की गुणवत्ता तथा अस्पतालों द्वारा दवाओं की खरीद और मरीजों को बिक्री की दरों की प्राथमिकता से जांच की।

लखनऊ के 12 निजी अस्पतालों में 26 औषधि निरीक्षकों की टीम ने किया औचक निरीक्षण

दवाओं के खरीद मूल्य और मरीजों से वसूले मूल्य में अंतर पर विभाग की नजर

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि अत्यधिक उपयोग में आने वाली तथा कुछ जीवन रक्षक औषधियो के क्रय मूल्य और मरीजों से वसूले गए विक्रय मूल्य में बड़ा अंतर है। अस्पताल द्वारा इन औषधियो को प्रिंटेड एमआरपी से काफी कम कीमत पर खरीदा जाता है, लेकिन मरीजों को लेबल पर अंकित एमआरपी पर या उस पर मामूली छूट देकर बेचा जा रहा है। जांच टीम द्वारा ऐसी औषधियो को चिन्हित करके उनकी गुणवत्ता विश्लेषण हेतु 38 नमूने संग्रहित किए गए। साथ ही, दवाओं के प्रिंटेड एमआरपी और अस्पतालों को आपूर्ति करने वाली थोक फर्मों/स्टॉकिस्ट द्वारा वसूले गए मूल्य यानी पीटीआर के बीच अंतर की भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

12 निजी अस्पतालों में हुई सघन जांच

अभियान के तहत डॉ. के.एन.एस. मेमोरियल हॉस्पिटल विकास खंड 2, शेखर हॉस्पिटल इंदिरा नगर, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल विराज खंड, तलवार स्किन इंस्टिट्यूट इंदिरा नगर, मेदांता लखनऊ, ग्लोब हॉस्पिटल निराला नगर, अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कानपुर रोड, अवध हॉस्पिटल एंड हार्ट सेंटर आलमबाग, विवेकानंद हॉस्पिटल निराला नगर, चरक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर दुबग्गा, मिड्लैन्ड हॉस्पिटल महानगर तथा रीजेंसी मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल खुर्रम नगर की फार्मेसियों का निरीक्षण किया गया।

लखनऊ के 12 निजी अस्पतालों में 26 औषधि निरीक्षकों की टीम ने किया औचक निरीक्षण

अपोलोमेडिक्स की ओपीडी फार्मेसी बंद करने के निर्देश

अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कानपुर रोड में जांच के दौरान जहां औषधियों की बिक्री के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम के अनुरूप बिक्री बीजक जारी किए जाने की स्थिति मिली, वहीं औषधियों से संबंधित स्टॉक लेजर, मरीजों की आईपीडी फाइलें और शेड्यूल एच1 औषधियों के क्रय-विक्रय से संबंधित अनिवार्य रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किए गए। जांच के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड में बैच नंबर भी अंकित नहीं पाए गए। इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए ओपीडी फार्मेसी को बंद करने के निर्देश दिए गए।

ग्लोब हॉस्पिटल में एक स्थान सील

ग्लोब हॉस्पिटल, राजाजीपुरम में औषधियों के क्रय-विक्रय संबंधी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। साथ ही औषधियां दो अलग-अलग स्थानों पर भंडारित मिलीं। इस स्थिति के दृष्टिगत औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत एक स्थान को सील किया गया।

रीजेंसी में बैच नंबर और स्टॉक में मिली विसंगतियां

रीजेंसी मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, खुर्रम नगर में बिक्री बीजकों पर फर्म का सही पता अंकित नहीं पाया गया। कुछ औषधियों के विभिन्न बैचों में भौतिक स्टॉक और अभिलेखीय स्टॉक में अंतर मिला। वितरित दवाओं के बैच नंबर और संबंधित बिक्री बीजकों में दर्ज बैच नंबरों में भी भिन्नता पाई गई।

लखनऊ के 12 निजी अस्पतालों में 26 औषधि निरीक्षकों की टीम ने किया औचक निरीक्षण

कई फार्मेसियों में स्टॉक रिकॉर्ड में अंतर

डॉ. के.एन.एस. मेमोरियल हॉस्पिटल में प्रावधानों के अनुरूप बिक्री बीजक जारी नहीं किए जाने की स्थिति सामने आई। इन बीजकों पर मरीज का पता, चिकित्सक का पंजीकरण नंबर और शेड्यूल एक्स औषधियों के लिए आवश्यक लाइसेंस नंबर अंकित नहीं पाया गया।

शेखर हॉस्पिटल में शेड्यूल एक्स औषधियों की खरीद निर्धारित लाइसेंस के बजाय चिकित्सक के नाम से किए जाने और भौतिक स्टॉक एवं स्टॉक लेजर में अंतर पाया गया। 

तलवार स्किन इंस्टिट्यूट में फार्मासिस्ट अनुपस्थित मिला। यहां भी भौतिक स्टॉक और स्टॉक लेजर में अंतर, बैच नंबर से जुड़ी अनियमितताएं, आवश्यक अभिलेखों के समुचित रखरखाव के बिना  MEDVOL ऐप के माध्यम से दवा ऑर्डर करने तथा क्रय बीजकों पर गलत पता दर्ज होने की स्थिति मिली।

मिड्लैन्ड हॉस्पिटल में कोल्ड-चेन के अंतर्गत रखी दवाओं के भौतिक स्टॉक और स्टॉक लेजर में अंतर मिला। अन्य औषधियों के भौतिक स्टॉक और अभिलेखीय स्टॉक में भी विसंगतियां पाई गईं।

फार्मेसी में वैकल्पिक दवाओं की उपलब्धता भी जांची गई

मेदांता लखनऊ और चरक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में उच्च मूल्य वाली कुछ औषधियों के लिए वैकल्पिक दवाओं की उपलब्धता नहीं पाई गई। विभाग द्वारा फार्मेसियों में दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को विकल्प मिलने की स्थिति को भी जांच के दायरे में रखा गया।

अवध हॉस्पिटल एंड हार्ट सेंटर में कई औषधियों के भौतिक स्टॉक और लेजर में अंतर मिला। फर्म की ओर से थोक औषधि लाइसेंस के अंतर्गत कारोबार न करने का दावा किया गया, जबकि खरीद अभिलेखों में लुपिन लिमिटेड सहित निर्माताओं से उसी लाइसेंस पर औषधियों की खरीद का विवरण मिला। फार्मेसी में भंडारण और साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

पहले चरण में 21 मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों की भी हुई जांच

प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत 24 सितंबर 2026 से की गई थी। प्रथम चरण में 16 जनपदों में स्थित 21 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों की जांच की गई। इस दौरान श्री राम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बरेली, शारदा स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, नोएडा और सुभारती मेडिकल कॉलेज, मेरठ में फार्मासिस्ट अनुपस्थित या आवश्यकतानुसार अपेक्षित संख्या से कम संख्या में नियुक्त पाए गए। हिंद मेडिकल कॉलेज बाराबंकी, सुभारती मेडिकल कॉलेज मेरठ और हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज वाराणसी में औषधियों के कोल्ड-चेन प्रबंधन एवं रखरखाव की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। हिन्द मेडिकल कॉलेज, बाराबंकी और यूनाइटेड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, प्रयागराज में एसेंशियल नारकोटिक्स ड्रग्स की अनुमोदित मात्रा से अधिक मात्रा में औषधियों की खरीद भी सामने आई।

नोटिस से लेकर थोक विक्रेताओं की जांच तक आगे बढ़ेगी कार्रवाई

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। अस्पतालों की फार्मेसियों में पाई गई अनियमितताओं के संबंध में संबंधित अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही दवाओं के प्रिंटेड एमआरपी और अस्पतालों को आपूर्ति करने वाली थोक फर्मों/स्टॉकिस्ट के पीटीआर
के बीच पाए गए अंतर के संबंध में निर्माता/मार्केटिंग फर्म और अस्पताल से स्थिति स्पष्ट करने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। अस्पतालों को दवा आपूर्ति करने वाले होलसेलर्स की भी जांच की जा रही है, ताकि दवाओं की आपूर्ति से लेकर मरीज को बिक्री तक पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सके। विभाग का फोकस केवल दवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को दवा उचित कीमत पर मिले, फार्मेसी में पारदर्शी खरीद-बिक्री व्यवस्था हो और प्रत्येक स्तर पर निर्धारित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो, इसी व्यापक उद्देश्य के साथ अभियान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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