शोधार्थियों के लिए समर स्कूल शोध को दिशा देने में निर्णायक होगा : प्रो शिवहर्ष सिंह

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शोधार्थियों के लिए समर स्कूल शोध को दिशा देने में निर्णायक होगा : प्रो शिवहर्ष सिंह


--ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में शोध प्रविधि पर हुई समर स्कूल की शुरुआत

प्रयागराज, 27 मई (हि.स)। ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, प्रयागराज के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा ‘‘शोध प्रविधि: शोध के लिए उपकरण निर्माण’’ (रिसर्च मेथोडोलॉजी: डिजाइनिंग टूल्स फॉर रिसर्च) विषय पर सात दिवसीय समर स्कूल की शुरुआत बुधवार को हुई। इस अवसर पर राजनीति विज्ञान के संयोजक प्रो. शिवहर्ष सिंह ने कहा कि शोधार्थियों के लिए यह समर स्कूल न केवल उनकी समझ को विस्तार देने में बल्कि उनके शोध को दिशा देने में निर्णायक साबित होगा।

उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि शोधार्थी को अपने शोध में तथ्यों का संग्रहण करते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए, जिससे शोध का उद्देश्य पूरा हो सके। शोधार्थी को तथ्य संग्रहण वस्तुनिष्ठ विधियों से करना चाहिए जिससे शोध की वस्तुनिष्ठता कायम रहे। उन्होंने कहा कि शोध का कार्य केवल नए ज्ञान का सृजन ही नहीं बल्कि मौजूदा ज्ञान का पुनः विश्लेषण करना भी है। उन्होंने कार्ल पॉपर का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने प्लेटो, अरस्तू, हीगल और मार्क्स के विचारों को नए तरीके से विश्लेषित किया।

राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि मनुष्य के विकास की प्रक्रिया आदिम युग से लेकर वर्तमान तक मनुष्य के भीतर की शोध प्रवृत्ति का परिणाम रही है, शोध का कार्य हमें एक पूर्ण मनुष्य बनाने की ओर ले जाता है।

राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.अखिलेश पाल ने कहा कि शोध के लिए उपकरणों का निर्माण पूरे शोधकार्य को अंतिम रूप देने में सबसे अधिक उपयोगी है। यदि उपकरणों का निर्माण और उनका प्रयोग क्रमबद्ध तरीके से किया जाय तो शोध को बेहतर तरीके से संपादित करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि सम्बंधित शोध के लिए साहित्य ढूंढ़ने हेतु गूगल स्कॉलर से लेकर जेस्टोर और रिसर्च गेट जैसे उपकरण हैं, शोध में संदर्भ देने हेतु जोटेरो और मेंडेली जैसे उपकरण उपलब्ध हैं। आंकड़ों के संग्रहण हेतु गूगल स्कॉलर सबसे सुलभ रूप से मौजूद है। इसके अलावा गुणात्मक आंकड़ों के विश्लेषण हेतु एनवीवो और मात्रात्मक आंकड़ों के विश्लेषण हेतु एसपीएसएस नामक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने प्लेजेरिज्म हेतु उपलब्ध सॉफ्टवेयर के बारे में भी बताया जिससे बौद्धिक चोरी से बचा जा सकता है।

महाविद्यालय के पीआरओ डॉ मनोज कुमार दूबे ने बताया कि इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रो डॉ. विवेक कुमार राय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा शोध के क्षेत्र में किए गए नवीनतम बदलावों की ओर सभी शोधार्थियों का ध्यान आकर्षित किया और समयबद्ध शोधकार्य के लिए प्रेरित किया। सात दिवसीय समरस्कूल में राजनीति विज्ञान विभाग के सभी शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकित पाठक ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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