शोध कार्य की सामाजिक उपादेयता अवश्य हो : डॉ. शिवहर्ष सिंह

शोध कार्य की सामाजिक उपादेयता अवश्य हो : डॉ. शिवहर्ष सिंह
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शोध कार्य की सामाजिक उपादेयता अवश्य हो : डॉ. शिवहर्ष सिंह


-रिसर्च डिजाइन पर हुई समर स्कूल की शुरुआत

प्रयागराज, 10 जून (हि.स.)। ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से रिसर्च डिजाइन और रिसर्च प्राविधि पर हफ्ते भर चलने वाले समर स्कूल की शुरुआत हुई। राजनीति विज्ञान विभाग के समन्वयक डॉ. शिवहर्ष सिंह ने कहा कि शोध कार्य की सामाजिक उपादेयता अवश्य होनी चाहिए। इसके लिए शोधार्थी को शोध के क्रमबद्ध नियम और चरणों का पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से विभिन्न विषयों पर राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा समर स्कूल का आयोजन किया जाता रहा है। विभाग में शोधार्थियों द्वारा साप्ताहिक रूप से अपने शोध प्रगति से सम्बंधित प्रस्तुतीकरण को अनिवार्य कर दिया गया है। समर स्कूल के पहले दिन रिसर्च डिजाइन पर क्रेसवेल की किताब ‘‘रिसर्च डिजाइन : क्वालिटेटिव, क्वांटिटेटिव एंड मिक्स्ड मेथड’’ से उद्धृत करते हुए डॉ. शिवहर्ष सिंह ने कहा कि शोध के विषय का चयन करते हुए सावधानी बरतनी चाहिए, शोध की समस्या का चयन करने में व्यक्तिगत रुचि, विषय की प्रासंगिकता, विषय पर उपलब्ध डेटा तक शोधार्थी की पहुंच, डेटा का विश्लेषण आदि बातों का ध्यान देना चाहिए।

समाज विज्ञानी, चुनाव विश्लेषक और राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अखिलेश पाल ने कहा कि शोधार्थी को फील्ड पर आंकड़े लेते समय वस्तुनिष्ठता का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। आंकड़े लेते समय विभिन्न प्रकार के चरों को लेना चाहिए जिससे आंकड़ों में विविधता रहे। विभिन्न चरों पर आधारित आंकड़ों के विश्लेषण से शोध के व्यापक फलक का अंदाजा लगता है। डॉ. पाल ने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था और चुनाव प्रणाली पर आधारित शोध विषयों के उदाहरणों से शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।

राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकित पाठक ने कहा कि शोध का विषय शोधार्थी की अकादमिक पहचान बनाता है। इसलिए शोधार्थी को शोध विषय का चयन करते हुए अपनी रुचियों, प्राथमिकताओं और वैचारिकी का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा शोध में व्यक्ति निष्ठता के साथ साथ वस्तुनिष्ठता भी होनी चाहिए। इसलिए उचित शोध प्राविधि का पालन शोधार्थी को करना चाहिए।

इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के नए शोधार्थियों की सिनोप्सिस की जांच पड़ताल की गई और उस पर संशोधन हेतु सुझाव दिए गए। इस दौरान विभाग के शोधार्थियों में क्रमशः कल्पना यादव, आमिर अंसारी, मुकेश कुमार, मनीष कुमार, गौरव कुमार, शिवम त्रिपाठी, सूरज सांघवी, शिवानी मोदी, रवि मिश्रा, कौशलेंद्र कुमार शुक्ला, अनुराग सिंह और वृजेश कुमार समेत कई शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/सियाराम

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