लखीमपुर मेडिकल कॉलेज मरीज के लिए बना संजीवनी, गले की जटिल गांठ की हुई सफल सर्जरी

WhatsApp Channel Join Now
लखीमपुर मेडिकल कॉलेज मरीज के लिए बना संजीवनी, गले की जटिल गांठ की हुई सफल सर्जरी


लखीमपुर मेडिकल कॉलेज मरीज के लिए बना संजीवनी, गले की जटिल गांठ की हुई सफल सर्जरी


बेहतर इलाज की तलाश में लखनऊ पहुंचे मरीज को लखीमपुर में मिला नया जीवन

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने की गले की जटिल गांठ की सफल सर्जरी

लखीमपुर खीरी, 23 अगस्त (हि.स.)। बेहतर इलाज की तलाश में राजधानी लखनऊ के अस्पतालों की दौड़ लगा रहे एक गंभीर मरीज को गृह जनपद में ही बड़ी राहत मिल गई। लखीमपुर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एक महीने की गहन चिकित्सकीय जांच और सटीक योजना के बाद मरीज के गले में मौजूद बड़ी व जटिल गांठ का सफल ऑपरेशन कर उसे पूरी तरह स्वस्थ कर दिया।

बताते चलें कि गले में तेज दर्द और बड़ी गांठ की समस्या से जूझ रहा मरीज लखनऊ के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुका था। थक-हारकर जब वह लखीमपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचा, तो ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा ने प्राथमिक परीक्षण के बाद मामले की गंभीरता को समझा। करीब एक माह तक मरीज के सभी जरूरी टेस्ट और विस्तृत मेडिकल इवैल्यूएशन करने के बाद सर्जरी की योजना बनाई गई।

गांठ का आकार बड़ा होने और संवेदनशील नसों के करीब होने के कारण यह सर्जरी काफी जोखिम भरी थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. आर. के. कोली तथा ई एन टी सर्जन डॉ. मनोज शर्मा की संयुक्त टीम ने बेहद सूझबूझ के साथ बिना किसी जटिलता या अत्यधिक रक्तस्राव के गांठ को पूरी तरह बाहर निकाल दिया।

लखीमपुर खीरी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य जिले के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस सफल सर्जरी के बाद अब लखीमपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन के लिए बड़े शहरों के महंगे अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।

वर्जन

टीबी की पुष्टि न होने के बाद किया गया ऑपरेशन : ई एन टी सर्जन

मरीज लखनऊ से कुछ पुरानी रिपोर्टों के साथ हमारे पास आया था, एक जाँच मे टी बी की गांठ होने का शक हुआ, जिससे असमंजस की स्थिति बन गयी। सटीक स्थिति जानने के लिए हमने अल्ट्रासाउंड, यूएसजी-गाइडेड FNAC और गांठ के अंदर के पदार्थ की CBNAAT जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट में यह पुष्ट हो गया कि यह टीबी (Tuberculosis) नहीं है।

टीबी की गांठ और सामान्य सिस्ट के इलाज का तरीका पूरी तरह अलग होता है, इसलिए यह जांच आवश्यक थी। जांच व लक्षणों के आधार पर यह 'डर्मॉइड सिस्ट' लग रही थी, जो थायरॉयड कार्टिलेज से शुरू होकर सीने की हड्डी के अंदर (रेट्रोस्टर्नल) तक फैली हुई थी। इसी आधार पर सुरक्षित सर्जरी कर गांठ को निकाला गया। अंतिम पुष्टि के लिए सैंपल पैथोलॉजिकल जांच हेतु भेजा गया है।

— डॉ. मनोज शर्मा

असिस्टेंट प्रोफेसर, ईएनटी विभाग, लखीमपुर मेडिकल कॉलेज

वर्जन

ट्यूमर थायरॉयड कॉर्टिलेज के साथ-साथ श्वास नली से भी चिपका हुआ था

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर. के. कोली ने जानकारी देते हुए कहा कि यह ट्यूमर थायरॉयड कॉर्टिलेज के साथ-साथ श्वास नली से भी चिपका हुआ था, जिसे काफी जटिलता और सावधानी के साथ निकाला गया। इस दौरान श्वास नली तथा मस्तिष्क को जाने वाली महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रूप से प्रिजर्व किया गया। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, संबद्ध जिला चिकित्सालय, इस प्रकार के जटिल मरीजों को उन्नत जांच एवं बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सदैव तत्पर है।

डॉ आर के कोली

वरिष्ठ जनरल सर्जन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी

हिन्दुस्थान समाचार / देवनन्दन श्रीवास्तव

Share this story