राज्यपाल की पहल पर विद्यार्थियों को अयाेध्या में मिला भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर
लखनऊ, 21 अप्रैल (हि.स.)। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल पर आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जन भवन, लखनऊ के 38 विद्यार्थियों का आध्यात्मिक नगरी अयोध्या के लिए शैक्षिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने वहां की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर से परिचय प्राप्त किया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों श्री राम लला मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, लता मंगेशकर चौक तथा सरयू नदी घाट सहित आरती घाट आदि का दर्शन किया। इन पावन स्थलों के दर्शन से विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, आस्था एवं परंपराओं के प्रति गहरी श्रद्धा और समझ विकसित हुई।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अयोध्या स्थित महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय का भी भ्रमण किया, जो भारत का प्रथम रामायण विश्वविद्यालय है और 12 जनवरी 2025 को स्थापित एक निजी शिक्षण संस्थान है। यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ समन्वित करते हुए रामायण के आदर्शों, वैदिक ज्ञान, भारतीय संस्कृति तथा आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित शिक्षण प्रदान करता है। यहाँ विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ जीवन जीने की कला, नैतिकता, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी जाती है। यहां प्रदान की जाने वाली शिक्षा विद्यार्थियों को जीवन के विविध आयामों को समझने में सक्षम बनाती है। रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन, ध्यान एवं योग के अभ्यास के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मबल, एकाग्रता, सकारात्मक दृष्टिकोण तथा उत्तम संस्कारों का विकास होता है, जिससे वे एक जिम्मेदार, संवेदनशील और नैतिक नागरिक के रूप में विकसित होते हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्राध्यापकों द्वारा रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत तथा ध्यान-योग के महत्व पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इन सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों की गहन एवं व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
राज्यपाल की सोच है कि विद्यार्थियों का विकास केवल कक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उनके मार्गदर्शन में इस शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया, ताकि विद्यार्थी अयोध्या जैसे पावन स्थल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। साथ ही, महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वित स्वरूप से परिचित कराने का भी प्रयास किया गया, जिससे उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना सुदृढ़ हो सके।
इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा सीखने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उनकी समझ और दृष्टिकोण व्यापक हुआ। यहाँ प्राप्त ज्ञान और प्रेरणा उनके व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होगी। ऐसे शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करते हैं, उन्हें अपनी संस्कृति के प्रति गौरव का अनुभव कराते हैं तथा जीवन में सही दिशा के चयन हेतु प्रेरित करते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

