सामाजिक संवेदनशीलता व व्यवहारिक ज्ञान के लिए विद्यार्थी साइकिल यात्रा से गांवों में जाएं : राज्यपाल

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सामाजिक संवेदनशीलता व व्यवहारिक ज्ञान के लिए विद्यार्थी साइकिल यात्रा से गांवों में जाएं : राज्यपाल


लखनऊ, 15 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को गांधी सभागार, जन भवन में मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर से संबद्ध राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक की। बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने निर्देश दिया कि महाविद्यालयों के विद्यार्थी साइकिल यात्रा निकालकर गांवों में जाएं। किसानों एवं ग्रामीणों के बीच बैठकर संवाद करें। उनकी समस्याओं को समझें तथा वापस आने के बाद अपने अनुभवों पर प्रोजेक्ट अथवा पुस्तक तैयार करें।

इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता एवं व्यवहारिक ज्ञान का विकास होता है। उन्होंने बताया कि जनभवन के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से साइकिल यात्रा निकाली थी, जिसमें स्वच्छता अभियान चलाया गया, पौधरोपण किया गया तथा कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राओं से संवाद स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं को समझा गया। बाद में जनभवन द्वारा उन मांगों को पूरा भी कराया गया।

उन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण पर विशेष बल देते हुए कहा कि भ्रमण की संपूर्ण व्यवस्था विद्यार्थी स्वयं करें। यात्रा का बजट, प्रबंधन, भोजन, भ्रमण स्थलों का चयन आदि सभी कार्य विद्यार्थी स्वयं संभालें तथा लौटने के बाद अपने अनुभवों, वहां की विशेषताओं एवं सीख पर भाषण, प्रोजेक्ट अथवा प्रस्तुतीकरण तैयार करें।

राज्यपाल ने निर्देश दिया कि जिन महाविद्यालयों में भवन अथवा कक्ष खाली पड़े हैं, वहां बेटियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएं। ऐसे प्रशिक्षण रोजगारपरक हों तथा विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त संस्थाओं से प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया जाए, जिससे भविष्य में उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सहायता मिल सके। उन्होंने शासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि महाविद्यालयों के लिए संचालित सभी सरकारी योजनाओं की विस्तृत लिखित जानकारी प्रत्येक संस्थान तक पहुंचाई जाए, ताकि विद्यार्थी एवं शिक्षण संस्थान उनका अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें।

राज्यपाल ने शोध कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि शोध पत्रों का इम्पैक्ट फैक्टर 5 से ऊपर होना चाहिए तथा उच्च गुणवत्ता वाले शोध को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने सभी महाविद्यालयों को आईक्यूएसी पोर्टल पर अपना समस्त डाटा पंजीकृत करने का निर्देश दिया, जिससे संस्थानों की गुणवत्ता संबंधी गतिविधियों का सुव्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार हो सके तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाया जा सके।

उन्होंने छात्राओं को राज्य सरकार द्वारा संचालित निःशुल्क साइकिल वितरण योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मेधावी छात्राओं के लिए प्रारम्भ की जा रही “रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना” के लिए भी महाविद्यालय अभी से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को डिजी शक्ति योजना के अंतर्गत स्मार्टफोन एवं टैबलेट उपलब्ध कराने तथा डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने महाविद्यालयों को यूपी प्रमाण पोर्टल पर आवश्यक डाटा एवं सूचनाएं नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी महाविद्यालयों को “वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन” तथा इन्फ्लिबनेट की सुविधाओं से जोड़ने पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध हो सके।

उन्होंने निर्देश दिया कि जिन महाविद्यालयों में जिम की सुविधा उपलब्ध है, वहां छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद उन्हें जिम सुविधा दी जाए तथा समय-समय पर पुनः स्वास्थ्य परीक्षण कर यह आंकलन किया जाए कि उन्हें क्या लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने छात्राओं को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने, रक्त जांच कराने तथा प्रत्येक महाविद्यालय में स्त्री रोग विशेषज्ञों को आमंत्रित कर स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता व्याख्यान आयोजित करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने सभी महाविद्यालयों में बाल मनोविज्ञान एवं गर्भ संस्कार को प्रोजेक्ट के रूप में लेने तथा इससे संबंधित पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए आह्वान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इंधन की बचत करने, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने, अनावश्यक आयात पर निर्भरता कम करने तथा सोने की अत्यधिक खरीद से बचने का संदेश दिया है। उन्होंने नागरिकों से तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय इस दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं तथा इन विषयों को अपने-अपने संस्थानों में व्यवहारिक रूप से लागू करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय

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