वाराणसी : प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने लगातार दूसरी बार कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया
—दूसरे कार्यकाल में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को वैश्विक ज्ञान-केन्द्र बनाने का संकल्प
वाराणसी, 22 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शनिवार को कुलपति कार्यालय में दूसरे कार्यकाल के लिए पुनः पदभार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ग्रहण किया। कार्यभार ग्रहण करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रतिष्ठित करने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रो. शर्मा ने कहा कि प्राच्य विद्या के इस प्राचीन केन्द्र के कुलपति के रूप में पुनः दायित्व मिलना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। कुलाधिपति एवं प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन पर पुनः विश्वास जताया है। विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक उत्तरदायित्व और विकास के संकल्प के रूप में इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वास को सार्थक करने के लिए कठोर अनुशासन, पारदर्शिता, समर्पण और निरन्तर कर्मशीलता के साथ कार्य किया जाएगा।
—235 वर्षों की गौरवशाली परम्परा को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य
प्रो. शर्मा ने कहा कि काशी स्थित यह विश्वविद्यालय 235 वर्षों से देवभाषा संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा की अविरल धारा को आगे बढ़ा रहा है। यह केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि भारत की प्राच्य ज्ञान-संपदा का महत्वपूर्ण केन्द्र है। उनके दूसरे कार्यकाल में इस विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक अकादमिक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में प्रारंभ किए गए और शेष रह गए कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई योजनाओं और विकास कार्यों को स्पष्ट कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा की जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक ज्ञान, तकनीक और समकालीन प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को परम्परा के साथ आधुनिकता से जोड़ना उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।
प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान में अनेक शिक्षक एवं आचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिसके कारण अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस चुनौती का समाधान विधिक एवं निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत शिक्षकों की नियुक्ति के माध्यम से किया जाएगा।
बताते चले प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 17 अगस्त 2026 को प्रो. बिहारी लाल शर्मा को विश्वविद्यालय के 38वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्ति आदेश निर्गत किया था। इससे पूर्व उन्होंने 22 अगस्त 2023 को 37वें कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

