एमटीए की पहल से समाप्त हुई जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, अस्पताल की सेवाएं हुईं सामान्य
मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए चिकित्सकों ने कार्य पर लौटने का लिया निर्णय
प्रयागराज, 22 मई (हि.स.)। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर में 20 मई को हुई घटना के बाद उत्पन्न विवाद का समाधान हो गया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) की पहल और वरिष्ठ चिकित्सकों के प्रयासों से जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी है, जिसके बाद अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं पुनः सुचारु रूप से संचालित होने लगी हैं।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल के सह आचार्य डॉ संतोष सिंह ने बताया कि, 20 मई की सुबह ट्रॉमा सेंटर में उपचार के लिए लाई गई एक महिला मरीज के परिजनों और ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट चिकित्सकों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और वस्तुस्थिति की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।
प्रधानाचार्य डॉ. वी.के. पाण्डेय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूर्ण होने तक संबंधित यूनिट में तैनात रेजिडेंट चिकित्सकों को निलंबित किया गया है। साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस कार्रवाई के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया था, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। हालांकि मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए जूनियर डॉक्टरों से संवाद स्थापित किया।
एमटीए के अध्यक्ष डॉ. दिलीप चौरसिया और सचिव डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी और मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। वरिष्ठ चिकित्सकों की समझाइश और सकारात्मक वार्ता के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।
एमटीए ने अपने वक्तव्य में कहा कि जूनियर डॉक्टर चिकित्सा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके सम्मान, सुरक्षा तथा न्यायपूर्ण व्यवहार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संगठन ने आशा व्यक्त की कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर पूरी की जाएगी।
हड़ताल समाप्त होने के बाद स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय और ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सा सेवाएं सामान्य हो गई हैं। मरीजों को राहत मिली है और उपचार संबंधी सभी व्यवस्थाएं पूर्ववत संचालित की जा रही हैं।
चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद, संवेदनशीलता और संस्थागत समन्वय के माध्यम से जटिल परिस्थितियों का समाधान संभव है। एमटीए की मध्यस्थता से न केवल गतिरोध समाप्त हुआ, बल्कि मरीजों के हितों को भी प्राथमिकता मिली, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रह सकीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

