युवा वर्ग भी तेजी से हो रहा हाई ब्लड प्रेशर का शिकार : डॉ. रूप कुमार बनर्जी

WhatsApp Channel Join Now
युवा वर्ग भी तेजी से हो रहा हाई ब्लड प्रेशर का शिकार : डॉ. रूप कुमार बनर्जी


गोरखपुर, 16 मई (हि.स.)। आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग, फास्ट फूड और जंक फूड का बढ़ता चलन तथा शारीरिक निष्क्रियता के कारण उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) तेजी से “साइलेंट किलर” के रूप में उभर रहा है।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने कहा कि पहले उच्च रक्तचाप की समस्या मुख्य रूप से वृद्धावस्था में दिखाई देती थी, लेकिन वर्तमान समय में युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित रक्तचाप धीरे-धीरे हृदय, मस्तिष्क, किडनी और आंखों को नुकसान पहुँचाता है तथा समय रहते नियंत्रण न होने पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि अत्यधिक नमक का सेवन, तनाव और चिंता, जंक फूड, मोटापा, धूम्रपान, शराब, अपर्याप्त नींद तथा मधुमेह और किडनी रोग उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण हैं। फास्ट फूड, चिप्स, पिज्जा, बर्गर और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक होने से शरीर में पानी रुकता है और रक्तचाप बढ़ने लगता है। वहीं लगातार मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबाव शरीर में तनाव हार्मोन बढ़ाकर हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।

डॉ. बनर्जी ने कहा कि कई बार उच्च रक्तचाप के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित BP जांच बेहद आवश्यक है। हालांकि सिरदर्द, चक्कर आना, घबराहट, थकान, अनिद्रा, सीने में भारीपन, सांस फूलना और चिड़चिड़ापन इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं।

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि नमक का सेवन सीमित करें, घर का ताजा एवं हल्का भोजन अपनाएँ, नियमित व्यायाम करें और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान एवं प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट तक तेज चाल से चलना हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया।

डॉ. बनर्जी के अनुसार पर्याप्त नींद, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा सकारात्मक सोच भी रक्तचाप नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि लहसुन, टमाटर, केला, नारियल पानी, चुकंदर, लौकी का रस, ओट्स, मेथी और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ लाभदायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें चिकित्सकीय सलाह के बाद ही सेवन करना चाहिए।

होम्योपैथी के संबंध में उन्होंने बताया कि यह केवल रक्तचाप की संख्या कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति की सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को संतुलित करने का प्रयास करती है। तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और पाचन संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार उपचार किया जाता है। उन्होंने लोगों से स्वयं दवा लेने के बजाय अनुभवी चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की।

अंत में उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य केवल दवाओं से नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली, शांत मन, संयमित भोजन और नियमित दिनचर्या से सुरक्षित रहता है। यदि हम आज अपनी आदतों में सुधार कर लें तो आने वाले वर्षों में कई गंभीर बीमारियों से स्वयं को बचा सकते हैं।”

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

Share this story