टास्क फोर्स ने तीन प्रतिष्ठानों से मुक्त कराए बाल मजदूर

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देवरिया, 17 जुलाई (हि.स.)। जिले में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर श्रम विभाग ने विशेष अभियान तेज कर दिया है।

श्रम प्रवर्तन अधिकारी दिनेश कुमार ने शुक्रवार काे बताया कि विशेष अभियान के तहत जिला टास्क फोर्स ने गौरीबाजार क्षेत्र में छापेमारी कर तीन गैर-खतरनाक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां कार्यरत तीन बाल एवं किशोर श्रमिकों को चिन्हित कर तत्काल मुक्त कराया गया। साथ ही संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों के विरुद्ध निरीक्षण टिप्पणी जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल बाल श्रमिकों को कार्यस्थल से हटाना नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना भी है। मुक्त कराए गए बच्चों को संबंधित विभागों के सहयोग से विद्यालयों में प्रवेश दिलाने, उनकी काउंसलिंग कराने तथा आवश्यकतानुसार सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। इसके साथ ही उनके परिवारों को विभिन्न स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चों को दोबारा मजदूरी न करनी पड़े।

उन्होंने बताया कि बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) कानून के तहत बाल श्रम कराना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास, 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों दंड का प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति दोबारा इस अपराध में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दिनेश कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रशासन, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस, बाल संरक्षण इकाइयों और आम जनता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षित बचपन और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। किसी भी बच्चे को मजदूरी करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

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