मौन का अर्थ मन को विचार शून्य करना : आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज

WhatsApp Channel Join Now
मौन का अर्थ मन को विचार शून्य करना : आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज


मुरादाबाद, 18 जुलाई (हि.स.)। मौन का अर्थ मन को विचार शून्य करना है। प्रत्येक व्यक्ति को समय के स्वरूप का निरंतर चिंतन करते हुए विनम्रता और संयम के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। यह बातें शनिवार को लोहागढ़ स्थित जैन मंदिर में चर्याशिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।

दो दिन पूर्व पीतल नगरी मुरादाबाद में चर्याशिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ है। 25 दिगम्बर जैन संतों के विशाल संघ के साथ आए आचार्य श्री ने आध्यात्मिक उल्लास से महानगर को भर दिया है।

आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने शनिवार को कहा कि मन को शांत करने लिए मोबाइल से दूर रहना, मोबाइल का उपवास आज के समय में वाकई एक बहुत बड़ी चुनौती है। रोटी या भोजन छोड़ना फिर भी शारीरिक रूप से संभव है, लेकिन मन और विचारों को शांत कर के दस दिन का मौन साधना या मोबाइल से पूरी तरह दूरी बनाना मानसिक शांति का प्रभावी उपाय है।

आचार्य श्री की कठोर तपस्या और त्यागमयी चर्या भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रेरणा का विषय है। दिगम्बर जैन संत 24 घंटे में एक बार आहार व जल गृहण करते हैं आचार्यश्री ने आहार में नमक और मीठा का पूर्णतः त्याग किया हुआ है वह नीरस भोजन लेते हैं और बड़ी प्रसन्नता से लेते हैं। उनका तप, संयम और वैराग्य जैन साधना की सर्वोच्च परंपरा का जीवंत उदाहरण है।

इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष राजीव जैन, निवर्तमान अध्यक्ष अनिल जैन, मंत्री अरविंद जैन, उपाध्यक्ष अरविंद जैन, कोषाध्यक्ष दीपक जैन, डॉ. पवन कुमार जैन, नितिन जैन, शुभम जैन, अनुज जैन, पंकज जैन, नमन जैन, महिला जैन समाज की अध्यक्ष नीलम जैन, पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर रामगंगा विहार समिति के अध्यक्ष संदीप जैन, मंत्री नीरज जैन, सर्वोदय जैन, विकास जैन, महिला समिति की अध्यक्ष ऊषा जैन, मंत्री सुषमा जैन, ऋतु जैन, आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर समिति के व्यवस्थापक राकेश जैन सहित जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

----------

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

Share this story