डॉ. आंबेडकर समान नागरिक संहिता के समर्थक एवं वामपंथ व मुस्लिम कट्टरपंथ के प्रखर विरोधी थे

WhatsApp Channel Join Now
डॉ. आंबेडकर समान नागरिक संहिता के समर्थक एवं वामपंथ व मुस्लिम कट्टरपंथ के प्रखर विरोधी थे


--वरिष्ठ साहित्यकार मुनीश त्रिपाठी की नई पुस्तक में आंबेडकर को लेकर बड़े और चौंकाने वाले दावे

औरैया, 14 जनवरी (हि. स.)। वरिष्ठ इतिहासकार एवं प्रतिष्ठित लेखक मुनीश त्रिपाठी की अपकमिंग पुस्तक “आंबेडकर, हिंदुत्व और भारत” में डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन, विचार और वैचारिक पक्षों को लेकर कई महत्वपूर्ण और चर्चित दावे किए गए हैं। पुस्तक में यह दावा किया गया है कि डॉ. आंबेडकर समान नागरिक संहिता के समर्थक थे और वे मुस्लिम कट्टरपंथ तथा वामपंथ के सख्त विरोधी थे। लेखक का कहना है कि आंबेडकर के इन पक्षों को लम्बे समय तक समाज और अकादमिक विमर्श से छिपाया गया।

उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रतिष्ठित केएम मुंशी पुरस्कार से सम्मानित मुनीश त्रिपाठी की यह चौथी पुस्तक है, जिसका विमोचन 16 जनवरी को दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के दौरान किया जाएगा। इससे पूर्व वे विभाजन की त्रासदी, भरतपुर का सूरजमल और द लाइन विच डिवाइडेड भारत जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक रह चुके हैं। वर्ष 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विमोचित संग्रह ग्रंथ लोकावलोकन में भी उनका लेख शामिल रहा है।

बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में मुनीश त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर को केवल दलित सुधारक और संविधान निर्माता के रूप में सीमित कर दिया गया, जबकि वे एक गहरे अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और धर्मवेत्ता भी थे। उन्होंने दावा किया कि डॉ. आंबेडकर मुस्लिम कट्टरपंथ के तीखे आलोचक थे और खिलाफत आंदोलन को असहयोग आंदोलन में शामिल किए जाने के निर्णय का उन्होंने खुलकर विरोध किया था।

पुस्तक में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1932 में पुणे प्रवास के दौरान डॉ. आंबेडकर की गाड़ी पर ‘ॐ’ अंकित भगवा ध्वज लहरा रहा था। लेखक के अनुसार, संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष होने के नाते हिंदू महासभा के कुछ सदस्यों ने उनसे भारत के भगवा ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किए जाने की मांग की थी, जिस पर उन्होंने सहयोग का आश्वासन दिया था। इसके अलावा डॉ. आंबेडकर द्वारा संस्कृत को राजभाषा बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किए जाने का भी दावा पुस्तक में किया गया है।

मुनीश त्रिपाठी का कहना है कि यह पुस्तक डॉ. आंबेडकर के वैचारिक संघर्ष, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण और उनके वास्तविक विचारों को सामने लाने का प्रयास है, जिससे नई पीढ़ी उनके व्यक्तित्व को व्यापक दृष्टि से समझ सके। पत्रकार वार्ता के दौरान प्रज्ञा प्रवाह से जुड़े डॉ. सुवेंद्र सिंह गौर, आशीष मिश्रा और संदीप शर्मा सहित कई गणमान्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

Share this story