भरतनाट्यम की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से झूम उठा देवा मेला, ‘रंग-ए-झूम’ में बिखरी भारतीय संस्कृति की छटा

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भरतनाट्यम की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से झूम उठा देवा मेला, ‘रंग-ए-झूम’ में बिखरी भारतीय संस्कृति की छटा


भरतनाट्यम की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से झूम उठा देवा मेला, ‘रंग-ए-झूम’ में बिखरी भारतीय संस्कृति की छटा


बाराबंकी, 01 नवंबर (हि स)। देवा मेला एवं प्रदर्शनी-2026 की सांस्कृतिक संध्या में रविवार को आयोजित ‘रंग-ए-झूम’ कार्यक्रम भारतीय शास्त्रीय नृत्य और आध्यात्मिक भावनाओं के अनूठे संगम का साक्षी बना। भरतनाट्यम की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्रीराम की महिमा, मां दुर्गा की शक्ति और भगवान शिव के विराट स्वरूप को कलाकारों ने अपनी नृत्य मुद्राओं के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दिया।

गुरु ‘कलाश्री’ सय्यद शमशुर रहमान के निर्देशन में भरतनाट्यम कलाकार अभिलाषा सिंह ने अनुष्का प्रकाश, यशिका शुक्ला, दिया चंद्रा, अक्षरा भारद्वाज, कशिश वर्मा एवं विधि गुप्ता के साथ शानदार प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों के लयबद्ध पद संचालन, आकर्षक भाव-भंगिमाओं और उत्कृष्ट तालमेल ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ ‘शुद्धं ब्रह्म परात्पर राम’ की प्रस्तुति से हुआ। इसमें कलाकारों ने भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप, आदर्श चरित्र और मर्यादा पुरुषोत्तम की महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया। इसके बाद ‘महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम’ पर आधारित प्रस्तुति में मां दुर्गा के शौर्य, शक्ति और महिषासुर पर विजय की गाथा को आकर्षक नृत्य मुद्राओं के जरिए प्रस्तुत किया गया।

वहीं, ‘शिव तांडव स्तोत्रम’ की प्रस्तुति में भगवान शिव के गंगाधर, नटराज और महाकाल स्वरूप की मनोहारी झलक देखने को मिली। शिव के प्रचंड तांडव और उनकी विभिन्न लीलाओं की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति ‘स्वरांजलि’ में भरतनाट्यम की शास्त्रीय सुंदरता, लय, ताल और पद संचालन का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

उल्लेखनीय है कि अभिलाषा सिंह ने गुरु ‘कलाश्री’ सय्यद शमशुर रहमान से भरतनाट्यम का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया है और इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।

पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शक तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे। ‘रंग-ए-झूम’ की प्रस्तुतियों ने देवा मेले की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाते हुए भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और आध्यात्मिक विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी

Livevns.news Desk
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