विनीत विनोचा हत्याकांड : 21 दिन बाद जेल से बाहर आईं बहू शालू, कोर्ट के आदेश पर हुई रिहाई

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विनीत विनोचा हत्याकांड : 21 दिन बाद जेल से बाहर आईं बहू शालू, कोर्ट के आदेश पर हुई रिहाई


कानपुर, 28 सितंबर (हि.स.)। करोड़पति दवा विनीत विनोचा हत्याकांड में जेल भेजी गईं उनकी बहू शालू को सोमवार को कोर्ट के आदेश पर रिहा कर दिया गया। पुलिस की जांच में हत्या में उनकी भूमिका सामने नहीं आने पर दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए।

शालू के बड़े भाई धीरज अरोड़ा और बहन सोनिया कानपुर जेल पहुंचे। सोनिया जेल के भीतर गईं और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद शालू बाहर आईं। मीडिया को सामने देखकर वह भावुक हो गईं और रोने लगीं। भाई ने उन्हें गले लगाकर संभाला। इसके बाद दोनों उन्हें अपने साथ लेकर चले गए। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने इसे राहत का क्षण बताते हुए कहा कि जांच के बाद शालू की भूमिका नहीं मिली और कोर्ट के आदेश से उन्हें जेल से बाहर आने का मौका मिला।

पांच सितंबर को इंदिरानगर स्थित रतन ऑर्बिट के सी-104 फ्लैट में दवा कारोबारी विनीत विनोचा की चाकू से हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर 17 वार मिलने की बात सामने आई थी। पुलिस ने सात सितंबर को शालू को हत्या के मामले में जेल भेजा था। करीब 21 दिन जेल में रहने के बाद सोमवार को उन्हें रिहाई मिली।

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस का शक विनीत के बेटे सुब्रत की ओर गया। 24 सितंबर को सुब्रत को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में उसने हत्या की साजिश में पूर्व नौकर विशाल गौतम और राजकिशोर के शामिल होने की बात बताई। पुलिस का दावा है कि सुब्रत ने पिता की कई महिलाओं से कथित नजदीकियों और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर हत्या की साजिश रचने की बात कही।

इसके बाद पुलिस ने शालू की भूमिका की भी जांच की, लेकिन उसके खिलाफ पर्याप्त तथ्य नहीं मिलने पर शुक्रवार को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई। इसी रिपोर्ट पर सोमवार को सुनवाई हुई और कोर्ट ने शालू की रिहाई के आदेश दिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच अधिकारी या अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा।

जेल से बाहर आने के बाद शालू के अपने ससुराल स्थित रतन ऑर्बिट फ्लैट जाने के बजाय मायके लखनऊ जाने की बात सामने आई है। उनका बेटा श्रीजय पहले से ही लखनऊ में मामा धीरज अरोड़ा के पास रह रहा है।

शालू के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने कहा कि उन्हें पहले दिन से ही भरोसा था कि शालू का हत्या से कोई लेना-देना नहीं है। 21वें दिन न्यायालय से उसकी रिहाई होना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि इस राहत का श्रेय कानपुर पुलिस को जाता है, क्योंकि पुलिस की जांच में ही शालू की बेगुनाही सामने आई।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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