नए रोगों से निपटने को प्रभावी टीकाकरण तकनीक का विकास आवश्यक: प्रो. वाई विमला

नए रोगों से निपटने को प्रभावी टीकाकरण तकनीक का विकास आवश्यक: प्रो. वाई विमला
नए रोगों से निपटने को प्रभावी टीकाकरण तकनीक का विकास आवश्यक: प्रो. वाई विमला


नए रोगों से निपटने को प्रभावी टीकाकरण तकनीक का विकास आवश्यक: प्रो. वाई विमला


मेरठ, 10 फरवरी (हि.स.)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रोफेसर वाई विमला ने कहा कि जीवाणु और वायरसों के संवेदनशीलता में वृद्धि के साथ, नई रोगों के विकास का खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे निपटने के लिए नई और प्रभावी टीकाकरण तकनीकों का विकास करना आवश्यक है।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग चल रही सात दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हो गया। मुख्य अतिथि सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिसिन एरोमेटिक प्लांट्स लखनऊ के प्रो. राकेश पांडेय, प्रोफेसर वाई विमला, प्रोफेसर अशोक कुमार चौबे उपस्थित रहे। प्रोफेसर जितेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।

प्रोफेसर राकेश पांडेय ने अपने व्याख्यान में माइक्रोबायोलॉजी में मॉडल जीवो के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मॉडल जीवों का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधानों में नए उपद्रवों की धारणा, उनके प्रभाव का अध्ययन, और नई उपचार विधियों की विकसित करने में मदद करता है। इससे वैज्ञानिक समुदाय को समझने में आसानी होती है कि कैसे जीनेटिक और मोलेक्यूलर स्तर पर प्रकारों की प्रेरणा, बिगड़ने और ठीक होने की प्रक्रियाएँ होती हैं। माइक्रोबायोलॉजिकल अनुसंधान की गति में वृद्धि होती है और नई उपचार विधियों का विकास संभव होता है।

प्रोफेसर अशोक कुमार चौबे ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में नए और उत्कृष्ट उपायों का विकास हमारे भविष्य को उज्जवल बना सकता है। नई टेक्नोलॉजी के साथ साथ, वैज्ञानिकों की साझेदारी और गठबंधन महत्वपूर्ण होगी जो अद्वितीय चुनौतियों का समाधान करने में सहायक हो सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार/डॉ कुलदीप/आकाश

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