वैज्ञानिक लेखन शोध की गुणवत्ता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम : डॉ. विनीता सिंह
कानपुर, 29 जून (हि.स.)। वैज्ञानिक लेखन शोध कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने और प्रभावी अकादमिक संप्रेषण का महत्वपूर्ण माध्यम है। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बेहतर शोध प्रकाशन के लिए वैज्ञानिक लेखन की तकनीकों में दक्ष होना चाहिए। यह बातें सोमवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता सिंह ने कहीं।
विस्तार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन विभाग की ओर से आर्ट एंड साइंस ऑफ साइंटिफिक राइटिंग फॉर कम्युनिटी साइंस विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में वैज्ञानिक लेखन, शोध पत्र तैयार करने और अकादमिक संचार के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर के संरक्षण में हुआ।
मुख्य वक्ता पीएचडी शोधार्थी दीक्षा श्रीवास्तव ने शोध पत्र लेखन, पांडुलिपि तैयार करने की प्रक्रिया, प्रभावी अकादमिक लेखन तथा उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक लेखन के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया।
डॉ. संघमित्रा ने वर्तमान शोध परिदृश्य में वैज्ञानिक लेखन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को नियमित रूप से शोध एवं लेखन गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. जया वर्मा और डॉ. ऐश्वर्या सिंह सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी तथा एमएससी एवं पीएचडी के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

