जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक सोच और सतत जल प्रबंधन जरूरी : प्रो. प्रफुल्ल सिंह
जौनपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार काे ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, मृदा, पर्यावरण और पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
मुख्य वक्ता दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने कहा कि जल जीवन, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन का आधार है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि विश्व की करीब 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है, जबकि वैश्विक जल संसाधनों में देश की हिस्सेदारी लगभग चार प्रतिशत है।
उन्होंने जल सुरक्षा के लिए वर्षाजल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भू-आकृति, भूमि उपयोग, जल निकासी, भूगर्भीय संरचना और वर्षा का समेकित अध्ययन कर भूजल पुनर्भरण वाले क्षेत्रों की वैज्ञानिक पहचान की जा सकती है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बीपी सिंह ने मृदा को पृथ्वी के जलवायु एवं पर्यावरणीय इतिहास का महत्वपूर्ण प्राकृतिक अभिलेख बताया। उन्होंने कहा कि मृदा के अध्ययन से अतीत की जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है। मृदा संरक्षण को सतत विकास के लिए आवश्यक बताया।
कुलपति प्रो. आरके सिंह का संदेश अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद यादव ने पढ़कर सुनाया। विषय प्रवर्तन प्रो. प्रदीप कुमार और स्वागत प्रो. मिथिलेश कुमार ने किया। संचालन अंजू यादव तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीरज अवस्थी ने किया। इस दौरान शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।--------------------
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

