कबीर अमृतवाणी सत्संग में गूंजे कबीर के दोहे, 'जो कुछ किया साहिब किया, तोते भये कबीर...'
महोबा, 01 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद मुख्यालय में संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में कठकुलवा स्थित कबीर आश्रम में कबीर अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रविवार को कार्यक्रम का शुभारंभ सत्संग कबीर वंदना जय कबीर जय कबीर, जय गुरु कबीरा। दास तोरे द्वार खड़े, उनकी हरो पीरा से हुआ।
समिति के प्रमुख एवं साईं डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एल.सी. अनुरागी ने कहा कि आज का मानव कुछ परोपकार, दान-पुण्य, गरीबों के लिए कुछ धन खर्च करता है तो अहंकार वश ढिंढोरा पीटता है कि मैंने महान कार्य किया, परंतु परमात्मा की कृपा को भूल जाता है कि परमात्मा ने आपके ऊपर कृपा की, जब आप दान, पुण्य, गरीबों की सेवा कर पाये। लोग आपको जान पाये। अतः परमात्मा की कृपा कभी न भूलें।
डॉ. अनुरागी ने साखी ना कछु किया न करि सका, न करने जोग शरीर। जो कुछ किया साहिब किया, तोते भये कबीर। की विस्तार से व्याख्या की।
पं. अवधेश ने सत्संग का महत्व बताया। उमराव सिंह उर्फ मुन्ना ने कबीर मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर की व्याख्या की। पं. हरिशंकर नायक ने कहा कि प्रेम की भक्ति से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।
भजनों में वीरभूमि राजकीय डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एस.एस. राजपूत ने साहब दुनिया में क्या हो रहा है, पाप हँसता, धर्म रो रहा है, प्रस्तुत किया। तो संगीत शिक्षक निलेश ने चदरिया हो गई पुरानी, अब तो सोच समझ अभिमानी, एवं पं. जगदीश रिछरिया ने ओ पापी मन कर लो भजन रचना प्रस्तुत की।अंत में निजाम मास्टर ने कुछ लेना न देना मगन रहना भजन सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
सत्संग में राधेश्याम कुशवाहा, रामेश्वर चौरसिया, मास्टर निजाम, भजन गायक इन्द्रजीत सिंह, कामता प्रसाद चौरसिया, विनोद, पं. आशाराम तिवारी, हरिश्चंद्र वर्मा, रामदीन अनुरागी, नन्दिनी अनुरागी आदि भक्त उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी

