पञ्च गौड़–पञ्च द्रविड़ समन्वय का प्रतीक बना ‘सारस्वत सम्मान’ समारोह
कानपुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। नौबस्ता स्थित राम-राधे वाटिका में गुरुवार को आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रख्यात मराठी चतुर्वेदज्ञाता आचार्य पं. बलवंत भाऊ शास्त्री पटवर्धन को ‘सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें सनातन धर्म की रक्षा, वेदों के अध्ययन-पाठन, कर्मकाण्डीय परंपराओं के संरक्षण तथा भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह का प्रमुख संदेश “पञ्च गौड़ और पञ्च द्रविड़ का परस्पर सम्मान, समन्वय और आत्मीय संगम” रहा। विद्वानों ने कहा कि यह सम्मान केवल एक आचार्य का अभिनंदन नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा की उस व्यापक चेतना का उत्सव है, जिसमें ज्ञान, साधना और संस्कृति क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर एकात्म भाव में प्रतिष्ठित होती है। मराठी द्रविड़ आचार्य का ब्राह्मण विद्वानों द्वारा सम्मान इस बात का सशक्त प्रमाण बना कि भारतीय परंपरा में विद्या, परस्पर श्रद्धा और सांस्कृतिक समन्वय ही वास्तविक शक्ति है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य रामगोपाल मिश्रा ने की तथा संचालन आचार्य रामप्रकाश शुक्ला द्वारा किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्याम जी तिवारी, आचार्य केशव, आचार्य ओमकार शास्त्री, आचार्य संजय त्रिवेदी, प्रमोद, रजनीकांत, रामजी तिवारी, वेदव्यास शुक्ल, सोमेश केलकर, निमिष त्रिपाठी एवं विक्रम पटवर्धन सहित अनेक विद्वानों ने आचार्य पटवर्धन की वैदिक निष्ठा और कर्मकाण्डीय विद्वता की सराहना की।
आचार्य की सुपुत्री डॉ. जाह्नवी केलकर ने उनके जीवन को वेद, संस्कार और समाज से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। अंत में सभी ने उनके दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

