संत समाज का उद्देश्य धर्म और समाज की रक्षा करना है:शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

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संत समाज का उद्देश्य धर्म और समाज की रक्षा करना है:शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद


जौनपुर,07 मार्च (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में नईगंज स्थित कंचन कॉम्प्लेक्स में शनिवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए गौ रक्षा और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अपने विचार रखे।उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा और सम्मान के लिए चल रहे आंदोलन को “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा” नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत वह 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे। उन्होंने कहा कि गौ माता पूरे विश्व की माता हैं और हर व्यक्ति को इसकी जानकारी और सम्मान होना चाहिए।शंकराचार्य ने कहा कि संत समाज का उद्देश्य धर्म और समाज की रक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकारें गौ रक्षा का वादा करके सत्ता में आती हैं, लेकिन उनके कथन और आचरण में एकरूपता दिखाई नहीं देती। उन्होंने बताया कि सरकार को 40 दिन का समय दिया गया था कि वह अपने कार्यों से गौ माता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध करे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए अब संत समाज आंदोलन के माध्यम से जवाब मांगेगा।उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और किसी के ऊपर भी झूठे मुकदमे लगाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि संत और असंत के बीच का भेद स्पष्ट किया जाए। प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज का शासक गाय को माता नहीं बल्कि संपत्ति के रूप में देखने लगा है, जो सनातन परंपरा और आस्था के विरुद्ध है।शंकराचार्य ने जौनपुर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है। गोमती नदी के तट पर गाय की सेवा और संरक्षण की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।उन्होंने बताया कि जौनपुर के जमैथा गांव में स्थित गोमती नदी तट पर महर्षि यमदग्नि मुनि ने गाय की सेवा की थी। इसी स्थान से अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा मिलती है। जौनपुर आकर महर्षि यमदग्नि का आशीर्वाद लेकर वह अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोमती नदी तट स्थित जमैथा गांव में महर्षि यमदग्नि मुनि के आश्रम पहुंचकर दर्शन-पूजन भी किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

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