संस्कृत सप्ताह : भाषा क्रीड़ा एवं श्लोक अन्त्याक्षरी में बटुकों ने दिखाया उत्साह

WhatsApp Channel Join Now
संस्कृत सप्ताह : भाषा क्रीड़ा एवं श्लोक अन्त्याक्षरी में बटुकों ने दिखाया उत्साह


सीतापुर, 26 अगस्त (हि.स.)। नैमिष क्षेत्र स्थित आत्मानन्द संस्कृत शिक्षण संस्थान में संस्कृतभारती, सीतापुर के तत्वावधान में चल रहे संस्कृत सप्ताह के अन्तर्गत बुधवार को निबन्ध प्रतियोगिता, भाषा क्रीड़ा एवं श्लोक अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह सभी प्रतियोगितायें संस्कृत भारती के कार्यकर्ता सत्येन्द्र पाठक के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुईं, जिनमें बटुकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

निबन्ध प्रतियोगिता में बटुकों ने संस्कृत में व्यक्त किए विचार

कार्यक्रम के प्रथम चरण में निबन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बटुकों ने संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति एवं नैमिषारण्य की महत्ता जैसे विषयों पर संस्कृत भाषा में अपने विचार लिखित रूप में प्रस्तुत किए। सत्येन्द्र पाठक ने बताया कि निबन्ध प्रतियोगिता का उद्देश्य बटुकों में संस्कृत में लेखन क्षमता का विकास करना तथा उन्हें अपने विचारों को शुद्ध संस्कृत में अभिव्यक्त करने हेतु प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि जब बालक किसी भाषा में लिखना प्रारम्भ करता है, तभी उस भाषा पर उसकी वास्तविक पकड़ बनती है।

भाषा क्रीड़ा से सहज हुआ संस्कृत सीखने का क्रम

निबन्ध प्रतियोगिता के पश्चात बटुकों को विविध भाषा क्रीड़ाओं के माध्यम से संस्कृत के शब्द-प्रयोग, वाक्य-रचना एवं संभाषण का अभ्यास कराया गया। इन क्रीड़ाओं में बटुकों ने समूहों में विभाजित होकर उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कक्षा में सम्पूर्ण समय आनन्दमय वातावरण बना रहा। सत्येन्द्र पाठक ने कहा कि भाषा क्रीड़ाओं के माध्यम से सीखी गई भाषा बालकों के मस्तिष्क में स्थायी रूप से अंकित हो जाती है और इससे संस्कृत के प्रति व्याप्त भय स्वतः ही समाप्त हो जाता है।

श्लोक अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता ने बांधा समां

कार्यक्रम का सबसे रोचक चरण रहा श्लोक अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता, जिसमें बटुकों को दो समूहों में विभाजित कर एक-दूसरे के समक्ष अन्तिम अक्षर से प्रारम्भ होने वाले श्लोकों का पाठ करने की चुनौती दी गई। इस प्रतियोगिता में बटुकों ने गीता, रामायण एवं अन्य संस्कृत ग्रन्थों के श्लोकों का स्मरण करते हुए बड़े उत्साह से भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान बटुकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल देखने को मिला, जिसने सम्पूर्ण कार्यक्रम को जीवन्त बना दिया।

कार्यक्रम के समापन पर सत्येन्द्र पाठक ने कहा कि संस्कृतभारती का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, अपितु बालकों में संस्कृत भाषा के प्रति स्वाभाविक लगाव उत्पन्न करना है, जिससे वे मम स्थाने संस्कृतम् के ध्येय को आत्मसात करते हुए अपने दैनिक जीवन में संस्कृत भाषा का प्रयोग करना प्रारम्भ करें।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

Share this story