नैमिषारण्य में गूंजी देववाणी, बटुकों ने खेल-खेल में सीखी संस्कृत

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नैमिषारण्य में गूंजी देववाणी, बटुकों ने खेल-खेल में सीखी संस्कृत


सीतापुर, 23 अगस्त (हि.स.)। संस्कृत भारती की ओर से नैमिष क्षेत्र स्थित आत्मानन्द संस्कृत शिक्षण संस्थान में संस्कृत सप्ताह के तहत बटुकों को भाषा क्रीड़ाओं के माध्यम से सहज एवं रोचक ढंग से संस्कृत सिखाई जा रही है। इस दौरान विद्यार्थियों में देववाणी के प्रति गहरा उत्साह देखने को मिला।

संस्कृत भारती के कार्यकर्ता अंशु गुप्ता ने विविध भाषा क्रीड़ाओं के माध्यम से बच्चों को संस्कृत के खेल खिलाए और उन्हें सहज रूप से संस्कृत शब्द-प्रयोग व वाक्य-रचना सिखाई। इस अवसर पर उन्होंने मम स्थाने संस्कृतम् के ध्येय वाक्य के साथ संस्कृत सम्भाषण सीखने और दैनिक जीवन में संस्कृत बोलने पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती वर्ष 1981 से निरन्तर संस्कृत भाषा के पुनरुज्जीवन में संलग्न है और देशभर में जाति, धर्म व वर्ग के भेद से ऊपर उठकर लाखों लोगों को संस्कृत सम्भाषण का प्रशिक्षण दे चुकी है। खेल-खेल में सीखी गई भाषा बच्चों के मन में स्थायी रूप से बैठ जाती है और इससे संस्कृत के प्रति भय समाप्त होकर स्वाभाविक लगाव उत्पन्न होता है।

कार्यक्रम में शिक्षण संस्थान के संस्थापक आचार्य सर्वेश शुक्ल भी उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने बटुकों को आशीर्वचन देते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति और संस्कार की आत्मा है। नैमिषारण्य जैसी ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि पर संस्कृत सप्ताह का आयोजन इस दिशा में एक शुभ संकेत है। उन्होंने संस्कृत भारती द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि बालकों में बचपन से ही संस्कृत के प्रति रुचि जागृत करना आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। संस्कृत सप्ताह के अन्तर्गत आगामी दिनों में भी विविध रोचक गतिविधियों के माध्यम से बटुकों को संस्कृत भाषा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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