संस्कृत और संस्कृति ही विकसित भारत का आधार : रमेश अवस्थी
- स्वावलम्बन और स्वदेशी आधारित विकास में संस्कृत बनेगा स्तम्भ : शशांक मणि
- संस्कृत विकास परिषद के समागम में 3 प्रस्तावों पर मुहर
देवरिया, 21 फ़रवरी (हि.स.)। पंडित सुरति नारायण मणि त्रिपाठी की स्मृति में बने संस्कृत विकास परिषद द्वारा देवारण्य संस्कृत समागम का आयोजन बरपार गांव स्थित जेईसीपी के बरगद सभागार में किया गया। इस समागम में पहुंचे प्रबुद्धजनों ने संस्कृत भाषा को भारतीय संस्कृति, स्वावलम्बन और स्वदेशी आधारित विकसित भारत के साथ विकसित देवरिया लोकसभा के निर्माण का प्रमुख आधार बताया।
देवारण्य संस्कृत समागम में संस्कृत विकास परिषद के संरक्षक एवं देवरिया लोकसभा के सांसद शशांक मणि ने चर्चा के लिए तीन प्रमुख बिदुंओं को रखा। जिसमें पहला, देवरिया-कुशीनगर को संस्कृत भाषा का देश में अग्रणी कैसे बनाया जाए। दूसरा संस्कृत भाषा के माध्यम से अपनी संस्कृति को कैसे मजबूत करें। तीसरा, संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए स्वालम्बन और स्वदेशी के माध्यम से विकसित भारत और विकसित देवरिया लोकसभा के लिए संकल्पित अमृत प्रयास में कैसे योगदान दे सकते हैं।
मुख्य अतिथि कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी और विशिष्ट अतिथि के रुप में पैकौली कुटी के पीठाधीश्वर कौशलेंद्र दास महाराज ने अपनी बात रखी। सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परम्परा की वाहक है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत तथा अर्थशास्त्र और नाट्यशास्त्र जैसे महान ग्रंथों ने भारतीय सभ्यता को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत ने सदियों से भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है और आज भी विकसित भारत के संकल्प को ऊर्जा देने की क्षमता रखती है।
विशिष्ट अतिथि और पैकौली कुटी के पीठाधीश्वर एवं पवहारी महाराज कौशलेंद्र दास ने कहा कि देवरिया से प्रारम्भ हुआ यह आंदोलन पूरे देश में फैलाया जाएगा। संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो राष्ट्र को एकजुट कर सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की पहचान को सशक्त कर सकती है। अमृत काल के दौरान हमें संस्कृत को पुनर्जीवित करने का प्रयास करना चाहिए।
वहीं संस्कृत विकास परिषद के संरक्षक और देवरिया लोकसभा के सांसद शशांक मणि ने परिषद के उदेश्यों को साझा करते हुए पूर्वांचल की धरती विशेषकर देवरिया कुशीनगर को ऋषि-मुनियों की तपो भूमि बताया। उन्होने कहा कि यहां ऋषियों ने लगभग 3,000 साल पहले तप किया और महाग्रंथ वेदों की रचना की। प्रभु राम और अयोध्या से जुड़ी पवित्र सरयू नदी इसके दक्षिण में बहती है। नारायणी नदी इसके उत्तर और पूर्व में बहती है, महर्षि वाल्मीकि ने यहां रामायण की रचना की। पवित्र नारायणी नदी में पाए जाने वाले शालिग्राम को विष्णु स्वरूप में पूजना, सरयूपारीण महाकवि तुलसीदास, भगवान विष्णु के 9वें अवतार बुद्ध का महापरिनिर्वाण, मगध में आर्यभट्ट की आर्यभटीय किताब का छपना, पतंजलि की रचनाओं का फलना-फुलना, ये सभी भारतीय सभ्यता को दर्शाने वाले प्रमाण, इसी इलाके की देन है। उन्होने परिषद के माध्यम से संस्कृत भाषा को वैश्विक बनाने पर जोर दिया जिसमें कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग, AI और आधुनिक तकनीकी के साथ संस्कृत को जोड़कर इसे और अधिक प्रासंगिक बनाने की बात कही।
इस समागम में संस्कृत विकास परिषद के सदस्यों ने तीन प्रमुख प्रस्तावों पर मुहर लगाई। जिसमें संस्कृत भाषा को बोलचाल की भाषा बनाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना। दूसरा, देवरही माता मंदिर के पुनर्निर्माण के साथ एक संस्कृत पुस्तकालय की स्थापना करना । जिसमें इस क्षेत्र से सम्बंधित पांडुलिपियां और अन्य धरोहरों को संरक्षित की जाएंगी और तीसरा, स्व. पं. सुरति नारायण मणि त्रिपाठी की स्मृति को चिर स्थायी बनाने के लिए, बैतालपुर से बलटिकरा सड़क का नाम रखना और जेईसीपी केंद्र से पहले तिराहे पर उनकी और उनकी धर्मपत्नी की प्रतिमा स्थापित करने के प्रयास को साझा किया।
परिषद के सदस्यों ने कहा कि संस्कृत और संस्कृति के माध्यम से पूर्वांचल न केवल अपनी पहचान को मजबूत करेगा बल्कि पूरे देश को आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से सशक्त भारत की दिशा में प्रेरित करेगा। समागम में उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संस्कृत भाषा के प्रसार हेतु सामूहिक संकल्प लिया। समागम की रुप रेखा संस्कृत विकास परिषद के सचिव प्रभाकर तिवारी ने तैयार की जिसमें परिषद के सदस्य, कौशल मिश्रा, मधुसूदन मणि त्रिपाठी, गिरीजेश मणि त्रिपाठी, हेमंत मिश्रा, डॉ. अभय द्विवेदी, डॉ. वीना कुमारी, अनिल मिश्र, मार्कंडेय मणि, वैदुर्य शाही, दुर्गेश नाथ त्रिपाठी, आशुतोष मणि ने परिषद के संरक्षक के नेतृत्व में प्रस्तावों को आगे ले जाने का संकल्प लिया।
समागम में देवरिया जिला पंचायत अध्यक्ष गिरीश चंद्र तिवारी, देवरिया सदर के विधायक, डा . शलभ मणि त्रिपाठी, बीजेपी देवरिया के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष राजेश मिश्रा, विजय प्रताप मणि (डब्लू), श्रीनिवास मणि, राज्य महिला आयोग की सदस्य ऋतु शाही, विजय कुमार दुबे, नरेंद्र मिश्रा पप्पू, अजय कुमार दुबे, अंतर्यामी सिंह, पवन मिश्रा, मारकंडे शाही, सुधीर श्रीवास्तव, नीरज शाही, अरुण कुमार सिंह, गंगा सिंह कुशवाहा, अर्चना पांडे, विंदेश पांडे, जयनाथ कुशवाहा, विजय बहादुर दुबे, बलराम उपाध्याय, डा अजय पांडे, रमेश तिवारी, कृष्णनाथ राय, रामाशीष प्रसाद, डब्लू मणि त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह, राजेश निषाद, दिवाकर चंद्र यादव सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

