लखनऊ की सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की कवायद तेज

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लखनऊ, 20 अगस्त (हि.स.)। योगी सरकार में प्रदेश के अंदर से गुजरने वाली सभी नदियों में गिरने वालों नालों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ में सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। सई नदी लखनऊ के सरोजनीनगर और मोहनलालगंज जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के पास से होकर प्रवाहित होती है। इसके प्रदूषण को रोकने के लिए नदी में जाने वाले नालों की पहचान कर उन्हें टैप करने, सीवेज को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने और शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल की योजना पर काम चल रहा है।

मौजूदा योजना के तहत सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले को टैप किया जा रहा है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज नदी में पहुंचता है। इसे रोकने के लिए 100 एमएलडी क्षमता वाले बिजनौर एसटीपी की परियोजना पर काम शुरू हो चुका है।

सई नदी में जाता है एक अनटैप्ड नाला

लखनऊ नगर क्षेत्र में सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले की पहचान हो चुकी है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज का डिस्चार्ज होता है। फिलहाल यह सीवेज नदी के प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत इस नाले को टैप कर सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए जरूरी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जा रही है, ताकि नाले से निकलने वाले पानी को शोधित करने के बाद ही उसका निस्तारण या दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

100 एमएलडी बिजनौर एसटीपी का निर्माण जारी

सई नदी में जाने वाले अनटैप्ड नाले को टैप करने के लिए 100 एमएलडी क्षमता वाले बिजनौर एसटीपी की परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। एसटीपी के तैयार होने के बाद नाले से आने वाले सीवेज को उपचारित किया जा सकेगा और बड़ी मात्रा में बिना शोधित सीवेज के सई नदी में पहुंचने की समस्या पर रोक लगेगी।

2044 तक सीवेज शोधन की पर्याप्त क्षमता

शहर में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित एसटीपी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लखनऊ में कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध हो जाएगी। इस क्षमता से वर्ष 2044 तक शहर में पैदा होने वाले सीवेज के शोधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है। परियोजनाएं पूरी होने के बाद किसी भी तरह का अशोधित सीवेज सई नदी में नहीं जाने देने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

शोधित पानी का भी होगा दोबारा इस्तेमाल

सीवेज शोधन के साथ-साथ शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। इस पानी का इस्तेमाल पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाना है। इससे एक ओर नदियों और जल स्रोतों पर दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर उद्योगों की पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए शोधित पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस पानी का उपयोग राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में भी बागवानी और सफाई के काम में किया जाएगा।

एयरपोर्ट पर भी शोधित पानी के इस्तेमाल का प्रस्ताव

बिजनौर में निर्माणाधीन 100 एमएलडी एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत शोधित पानी को राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एयरपोर्ट की विभिन्न जरूरतों में शोधित पानी का उपयोग किया जा सकेगा। इससे साफ पानी की खपत कम करने और सीवेज ट्रीटमेंट के बाद मिलने वाले पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

सीवेज को नदी तक पहुंचने से रोकना मुख्य लक्ष्य

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह के मुताबिक लखनऊ में सीवेज प्रबंधन की पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अशोधित सीवेज को सई नदी में पहुंचने से रोकना है। इसके लिए नालों की टैपिंग के साथ-साथ पर्याप्त एसटीपी क्षमता विकसित की जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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