भारत की समृद्ध परंपरा को समझने की जरूरत : स्वांत रंजन

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भारत की समृद्ध परंपरा को समझने की जरूरत : स्वांत रंजन


लखनऊ, 06 सितंबर (हि.स.)। सहकारिता क्षेत्र में समाज के बीच कार्य करने वाली संस्था सहकार भारती का दो दिवसीय प्रदेश अभ्यास वर्ग रविवार को एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, सीतापुर रोड, लखनऊ के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन सत्र का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर बोलते हुए स्वांत रंजन ने कहा कि भारत की संस्कृति, परंपरा और धर्मबोध को साथ लेकर आगे बढ़ने और देश की समृद्ध परंपरा को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सहकार भारती आर्थिक क्षेत्र में कार्य कर रही है और इसके कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण वर्ग का विशेष महत्व है।

स्वांत रंजन ने कहा कि भारत को लंबे समय तक अशिक्षित और गरीब देश के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। जबकि ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत में शिक्षा की समृद्ध व्यवस्था थी।

उन्होंने कहा कि विभिन्न ऐतिहासिक अध्ययनों और अंग्रेजों के गजेटियर में भी भारत की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। कई क्षेत्रों में गांव-गांव में पाठशालाएं थीं, जिनकी व्यवस्था स्थानीय समाज मिलकर करता था। इनमें विभिन्न जाति और समुदायों के लोग शिक्षा प्राप्त करते थे। अंग्रेजी शासन के दौरान इस व्यवस्था को कमजोर किया गया और मिशनरी संस्थाओं के माध्यम से अलग शिक्षा व्यवस्था विकसित की गई।

स्वांत रंजन ने कहा कि भारत कभी गरीब देश नहीं रहा। लंबे समय तक आर्थिक शोषण के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने कहा कि देश को फिर से समृद्ध और स्वावलंबी बनाने के लिए समाज के सामान्य वर्ग को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि सहकार भारती कोई सरकारी संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाला संगठन है। इसलिए सभी को साथ लेकर चलना और समाज के हर वर्ग से मित्रता बनाए रखना जरूरी है।

विधान परिषद सदस्य एवं एसआर ग्रुप के चेयरमैन पवन सिंह चैहान ने कहा कि वह स्वयं सहकारिता की भावना का जीता-जागता उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने गांव के लोगों के खेतों में सरसों की बुवाई से अपनी शुरुआत की और अब तक 18 विभिन्न व्यवसायों में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि महज 700 रुपये से शुरू किया गया उनका प्रयास आज 7,000 विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराने वाले संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है।

उन्होंने कहा कि वह संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित करते हैं। केवल नौकरी पाने के उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को रोजगार पाने के साथ ही रोजगार देने वाला बनने का लक्ष्य भी रखना चाहिए।

सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि भारत की मिट्टी में सहकारिता की भावना और इसकी परंपरा सदियों से रही है।सहकार भारती का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति निर्माण और संस्कारवान कार्यकर्ता तैयार करना भी है। कार्यकर्ता का चरित्र और आचरण निरंतर बेहतर होता रहना चाहिए। सहकार भारती समाज को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अशोक कुमार शुक्ला, शिवेंद्र प्रताप सिंह, रमाशंकर जायसवाल, हिरेन्द्र मिश्र, सुरेंद्र सिंह चैहान, संजय सिंह चैहान, राम कुमार दीक्षित, पीयूष कुमार मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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