व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा : रमेश प्रांत प्रचारक

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व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा : रमेश प्रांत प्रचारक


व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा : रमेश प्रांत प्रचारक


गोरखपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है। शाखा के माध्यम से व्यक्ति में ऐसा सामर्थ्य विकसित होता है, जिससे वह समाज के सज्जनों का संरक्षण करने, समाज को अनिष्ट से बचाने, शील की रक्षा करने तथा संकट के समय समाज के काम आने में सक्षम बनता है। शाखा में प्रतिदिन केवल एक घंटे के दौरान खेल, व्यायाम, गीत, बौद्धिक एवं आपसी आत्मीयता जैसे कार्यक्रम होते हैं, लेकिन इस एक घंटे के पीछे व्यक्ति निर्माण और समाज निर्माण की सतत प्रक्रिया चलती रहती है।

यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक रमेश जी ने रविवार को पाम पैराडाइज में आयोजित गोरखपुर महानगर के बुद्ध नगर के एकत्रीकरण को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि संघ कार्य का मूल उद्देश्य समाज में संगठित, संस्कारित और सामर्थ्यवान व्यक्ति तैयार करना है। शाखा केवल खेल खेलने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का माध्यम है। शाखा से प्राप्त संस्कार व्यक्ति को समाज के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराते हैं और उसे राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।

प्रांत प्रचारक ने कहा कि पूज्य बालासाहब देवरस जी ने भी शाखा के व्यापक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा था कि संघ की शाखा केवल खेल का स्थान नहीं है। यह सज्जनों की सुरक्षा का बिन बोले अभिवचन है, तरुणों को अनिष्टकारी व्यसनों से दूर रखने वाला संस्कारपीठ है, महिलाओं के प्रति सम्मानपूर्ण आचरण का आश्वासन है तथा समाज पर अचानक आने वाली विपदाओं और संकट के समय त्वरित एवं निरपेक्ष सहायता उपलब्ध कराने का आशा केंद्र है।

उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में भगवान के विभिन्न अवतारों की चर्चा मिलती है। वर्तमान कलियुग में भी समाज-जागरण और समाज के संरक्षण के लिए संगठन शक्ति की आवश्यकता है। इसी भाव को संघ में कहा जाता है— “संघे शक्ति कलियुगे।” रमेश जी ने कहा कि 27 सितंबर 1925 को नागपुर में संघ रूपी संगठन शक्ति का प्रकट होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभ था। आज शाखा के माध्यम से वही संगठन शक्ति व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुंचकर समाज को संगठित करने का कार्य कर रही है। संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में संस्कार, समाज में संगठन और राष्ट्रजीवन में सामर्थ्य का निर्माण करना है।

उन्होंने कहा कि जब सज्जन शक्तियां संगठित होती हैं तो समाज के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने का सामर्थ्य पैदा होता है। इसलिए प्रत्येक स्वयंसेवक का प्रयास होना चाहिए कि शाखा नियमित रूप से चले, अधिक से अधिक व्यक्ति उससे जुड़ें, संस्कारित एवं सामर्थ्यवान बनें और समाज के काम आएं। शाखा का एक घंटा वास्तव में केवल एक घंटा नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण, समाज संरक्षण और राष्ट्र निर्माण की साधना है।

डेढ़ घंटे चला एकत्रीकरण

बुद्ध नगर में आयोजित एकत्रीकरण में क्षेत्र की सभी शाखाओं के 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। इस दौरान शाखा का संचालन करीब डेढ़ घंटे तक हुआ। स्वयंसेवकों ने विभिन्न शारीरिक एवं बौद्धिक गतिविधियों में सहभागिता की और संगठनात्मक अनुशासन तथा सामूहिकता का परिचय दिया।

कार्यक्रम में प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल, सोमनाथ, संकर्षण, चंद्रमणि, राजेश, संजय, जिला प्रचारक मनीष, सायं प्रचारक संजीव, भारतेंदु, पद्माकर, निकेश सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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