योगी सरकार का गेहूं खरीद में फार्म रजिस्ट्री की अनिवार्यता खत्म करना स्वागत योग्य निर्णय : पवन भाई गुप्ता
आरपीआई की सरकार से मांग, सरकारी मुलाजिम व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं, नमी के मानकों में दी जाए ढील
लखनऊ, 20 अप्रैल (हि.स.)। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने प्रदेश सरकार की ओर से गेहूं खरीद प्रक्रिया में 'फार्म रजिस्ट्री' की अनिवार्यता को समाप्त करने के निर्णय का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने इसे देर से उठाया गया सही कदम बताते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े किए।
पवन भाई गुप्ता ने सोमवार को अपने जारी बयान में कहा कि सरकार को किसानों की पीड़ा समझने में 20 दिन लग गए। यदि गेहूं क्रय नीति घोषित करते समय ही सरकार फार्म रजिस्ट्री की जटिलता को अनिवार्य न करती, तो आज अन्नदाता को क्रय केंद्रों पर धक्के नहीं खाने पड़ते। उन्होंने कहा कि पंजीकरण की इस जटिल प्रक्रिया के कारण हजारों किसान अब तक अपनी फसल बेचने से वंचित रह गए थे।
नमी का मुद्दा बना किसानों के लिए 'जी का जंजाल'
आरपीआई (आ.) के प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार का ध्यान एक और गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि केवल फार्म रजिस्ट्री खत्म करना पर्याप्त नहीं है। बेमौसम हुई बारिश ने किसानों को दोहरा झटका दिया है। एक तरफ फसल को क्षति पहुंची है, तो दूसरी तरफ गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई है। सरकारी केंद्रों पर बैठे मुलाजिम व्यावहारिक दिक्कतों को सुनने को तैयार नहीं हैं। नमी के नाम पर किसानों को वापस लौटाया जा रहा है, जो सरासर अन्याय है।
आंकड़ों की हकीकत, पंजीकरण का संकट
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश में गेहूं खरीद का लक्ष्य काफी बड़ा है, लेकिन जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण लक्ष्य की तुलना में पंजीकरण की गति काफी धीमी रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब तक लाखों किसानों ने पंजीकरण का प्रयास किया, लेकिन फार्म रजिस्ट्री और पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में किसान अधर में लटके रहे। हजारों क्विंटल गेहूं केंद्रों के बाहर खुले में पड़ा है क्योंकि मानक (नमी) पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
शादियों (सहालग) के सीजन में आर्थिक तंगी
श्री गुप्ता ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में शादियों और 'सहालग' का सीजन चल रहा है। किसान अपनी पारिवारिक जरूरतों और सामाजिक दायित्वों के लिए पूरी तरह अपनी उपज की बिक्री पर निर्भर है। फसल न बिकने के कारण उसे भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि गेहूं में नमी (Moisture) की सीमा के मानकों में तत्काल ढील दी जाए ताकि बारिश से प्रभावित फसल खरीदी जा सके। क्रय केंद्रों पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए और किसानों के साथ संवेदनशीलता से व्यवहार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए जाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

