एसआईआर पर अभाविप ने आयोजित की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस, लोकतांत्रिक प्रक्रिया एवं मतदाता सूची की शुद्धता पर हुआ विमर्श

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एसआईआर पर अभाविप ने आयोजित की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस, लोकतांत्रिक प्रक्रिया एवं मतदाता सूची की शुद्धता पर हुआ विमर्श


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एसआईआर पर अभाविप ने आयोजित की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस, लोकतांत्रिक प्रक्रिया एवं मतदाता सूची की शुद्धता पर हुआ विमर्श


गोरखपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आयाम शोध कार्य के तत्वावधान में विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R.) विषय पर एक दिवसीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कमेटी हॉल में किया गया। दो सत्रों में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे और विषय के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी, विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शैलेश सिंह तथा अभाविप गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह उपस्थित रहे। प्रथम सत्र का संचालन अभाविप गोरखपुर महानगर के उपाध्यक्ष डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने किया।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R.) पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान में देशभर में S.I.R. को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर चर्चा होना स्वाभाविक है, लेकिन आवश्यक है कि इस विषय पर होने वाला विमर्श तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर हो। निर्वाचन आयोग का प्रमुख दायित्व निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है, जिसमें मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार का विशेष महत्व है। लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सहभागिता, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और जनप्रतिनिधियों के चयन की निष्पक्ष प्रक्रिया पर आधारित है। निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है। इस संदर्भ में S.I.R. की प्रक्रिया, उसके उद्देश्यों और विभिन्न चरणों को समग्रता से समझना आवश्यक है। किसी भी प्रक्रिया के संबंध में अपनी राय बनाने से पहले तथ्यों का अध्ययन करना और उसके वास्तविक उद्देश्यों को समझना चाहिए।

विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शैलेश सिंह ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R.) को लेकर समाज में अनेक प्रकार की भ्रांतियाँ फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि इसका मूल उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाना है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सम्मिलित हों और अपात्र प्रविष्टियों को नियमानुसार हटाया जाए। यह प्रक्रिया किसी के मताधिकार को छीनने के लिए नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए है। भारत का निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एस.आई.आर. जैसी प्रक्रिया को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय संवैधानिक प्रावधानों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के व्यापक हित में समझा जाना चाहिए। प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने तथा आवश्यक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पात्रता सुनिश्चित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

वहीं द्वितीय सत्र का शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री आशीष चौहान, बुद्धा पी.जी. कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र मिश्रा तथा अभाविप गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह की उपस्थिति में हुआ। इस सत्र का संचालन अभाविप गोरक्ष प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ. निगम मौर्य ने किया।

अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने द्वितीय सत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R.) एवं भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची की शुद्धता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र के महत्वपूर्ण आधार हैं। चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर समय-समय पर उठने वाले सवालों पर विचार करते हुए आवश्यक है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले तथ्यों, प्रमाणों और वास्तविक परिस्थितियों का समुचित अध्ययन किया जाए। चुनाव परिणाम किसी दल की अपेक्षाओं के अनुरूप न होने मात्र से पूरी निर्वाचन प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है। लोकतांत्रिक विमर्श में आरोपों के साथ प्रमाण और तर्क भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R.) के संदर्भ में मतदाता सूची की शुद्धता तथा निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार का संरक्षण सर्वोपरि है। साथ ही, मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के प्रयासों को तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में समझना चाहिए। इस विषय पर किसी भी प्रकार की चर्चा में नागरिकों के अधिकारों, निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को केंद्र में रखा जाना आवश्यक है। लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन की व्यवस्था नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत मर्यादाओं और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। इसमें असहमति, आलोचना और वैचारिक बहस का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इनका आधार तथ्य, तर्क और संवैधानिक मर्यादाएँ होनी चाहिए। मीडिया एवं सार्वजनिक विमर्श से जुड़े सभी पक्षों का दायित्व है कि वे किसी भी विषय को प्रस्तुत करते समय तथ्यों की पुष्टि करें और समाज में जिम्मेदार संवाद को बढ़ावा दें।

बुद्धा पी.जी. कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र मिश्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इसे केवल निर्वाचन आयोग द्वारा संपन्न कराई जाने वाली प्रक्रिया मानना उचित नहीं है, बल्कि इसके प्रत्येक चरण में पारदर्शिता, सत्यापन और जवाबदेही के पहलुओं को समझना आवश्यक है। बूथ लेवल पर होने वाली गतिविधियों से लेकर मीडिया की भूमिका और उसके दायित्वों तक, प्रत्येक विषय पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और आलोचना के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन यह संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती तथ्यपरक संवाद, संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति विश्वास और जिम्मेदार नागरिक सहभागिता में निहित है। अराजकता का लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई स्थान नहीं है।

एस.आई.आर. विषय पर आयोजित दोनों सत्रों के दौरान शोधार्थियों ने वक्ताओं से विषय से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण एवं जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। शोधार्थियों ने एस.आई.आर. की संवैधानिक वैधता, इसकी प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा तथा निर्वाचन आयोग की भूमिका जैसे विषयों पर अपनी जिज्ञासाएँ रखीं। वक्ताओं ने शोधार्थियों के प्रश्नों का तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में उत्तर देते हुए विषय के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट किया। इस संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को एस.आई.आर. की प्रक्रिया, उसके उद्देश्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम में अभाविप पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख प्रो. सुषमा पांडेय, प्रो. विनय सिंह तथा अभाविप गोरक्ष प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री पुनीत अग्रवाल सहित अभाविप के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

Livevns.news Desk
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