वैज्ञानिक तकनीक को जमीनी स्तर पर पहुंचाने के लिए केवीके बेहतर विकल्प : निदेशक
फसल अवशेषआईसीएआर–अटारी, कानपुर में कृषि प्रसार एवं केवीके गतिविधियों पर निदेशकों के मध्य हुई समीक्षा बैठक
कानपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) किसानों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो रहे हैं। इन केन्द्रों के जरिए किसानों को नवीनतम तकनीकी ससमय उपलब्ध हो जाती है। जिसका असर फसल उत्पादन पर सीधा देखा जा सकता है। ऐसे में केवीके के माध्यम से अनुसंधान एवं प्रसार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। इससे किसानों की आय वृद्धि हेतु वैज्ञानिक तकनीकों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन दिखेगा। यह बातें बुधवार को आईसीएआर (अटारी), जोन-तृतीय, कानपुर के निदेशक डा. राघवेंद्र सिंह ने कही।
आईसीएआर (अटारी), जोन-तृतीय, कानपुर में कृषि प्रसार एवं कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की गई। बैठक में अटारी, कानपुर के निदेशक डा. राघवेंद्र सिंह, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा के निदेशक प्रसार डा. एन.के. बाजपेयी, प्रधान वैज्ञानिक डा. अजय कुमार सिंह सहित अटारी, कानपुर के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
समीक्षा बैठक के दौरान निदेशक प्रसार डा. एन.के. बाजपेयी ने बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सात कृषि विज्ञान केन्द्रों में भाकृअनुप की विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति से अवगत कराया। साथ ही कृषि प्रसार, केवीके-आधारित कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण गतिविधियों तथा किसानों तक नवीन तकनीकों की प्रभावी पहुंच से समबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के कृषि विकास में केवीके की भूमिका, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता, तकनीकी प्रसार की वर्तमान स्थिति तथा केवीके के समक्ष विद्यमान चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसके उपरान्त सभी प्रतिभागियों द्वारा अटारी, कानपुर में संचालित प्राकृतिक खेती प्रक्षेत्र परीक्षण का भी अवलोकन किया गया।
बैठक के अंत में अटारी, कानपुर एवं बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच आपसी समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने, तथा केवीके-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को अधिकतम लाभ पहुँचाने हेतु संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमति व्यक्त की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / अजय सिंह

