गाेरखपुर मंडल में राजस्व व्यवस्था को मिली नई तकनीक, खेतों की नापजोख अब होगी हाईटेक

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गाेरखपुर मंडल में राजस्व व्यवस्था को मिली नई तकनीक, खेतों की नापजोख अब होगी हाईटेक


गाेरखपुर मंडल में राजस्व व्यवस्था को मिली नई तकनीक, खेतों की नापजोख अब होगी हाईटेक


गोरखपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। गोरखपुर मंडल में राजस्व कार्यों को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब खेतों की नापजोख पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाएगी। इस क्रम में अपर आयुक्त (न्यायिक) अजय राय द्वारा मंडल की सभी तहसीलों के तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को जीएनएसएस (GNSS) आधारित आधुनिक नाप उपकरण ट्रिम्बल कैटालिस्ट DA2 वितरित किए गए हैं। इन उपकरणों की कुल लागत पांच लाख रुपये से अधिक बताई गई है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य खेतों की पैमाइश में शत-प्रतिशत सटीकता सुनिश्चित करना, भूमि विवादों को कम करना तथा राजस्व कार्यों को डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि आम जनता, विशेषकर किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

मंडल की सभी तहसीलों को मिला लाभ

गोरखपुर मंडल के चारों जनपदों की प्रमुख तहसीलों को यह उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं—

गोरखपुर: सदर, बांसगांव, गोला, खजनी, सहजनवा, कैंपियरगंज

देवरिया: देवरिया सदर, बरहज, सलेमपुर, रुद्रपुर, भाटपार रानी

कुशीनगर: पडरौना, कसया, हाटा, तमकुहीराज, खड्डा

महाराजगंज: सदर, नौतनवा, फरेंदा (आनंदनगर), निचलौल

कैसे काम करेगी नई व्यवस्था

जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) तकनीक उपग्रह के माध्यम से भूमि की स्थिति को अत्यंत सटीकता के साथ निर्धारित करती है। इस तकनीक के उपयोग से खेतों और भूखंडों की नापजोख अब डिजिटल माध्यम से रीयल टाइम में संभव होगी। इससे पारंपरिक माप प्रणाली में होने वाली त्रुटियों को काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा।

राजस्व कार्यों में व्यापक उपयोग

इस आधुनिक उपकरण के माध्यम से राजस्व विभाग निम्न कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेगा—

खेतों एवं प्लॉट की सटीक पैमाइश

जमीन की सीमा निर्धारण (डिमार्केशन)

भूमि विवादों के त्वरित समाधान

राजस्व अभिलेखों का मिलान एवं अद्यतन

सरकारी योजनाओं हेतु भूमि चिन्हांकन

अवैध कब्जों की पहचान

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

नई तकनीक के लागू होने से किसानों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे। अब उन्हें कम समय में सटीक माप मिल सकेगा, जिससे विवादों में कमी आएगी। बार-बार नापजोख कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी सुविधा होगी।

अधिकारियों को दिए गए स्पष्ट निर्देश

अपर आयुक्त (न्यायिक) अजय राय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन उपकरणों का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। साथ ही, इनके रखरखाव और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावी बनी रहे।

बेहतर परिणाम की उम्मीद

प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई तकनीक के प्रयोग से गोरखपुर मंडल में राजस्व कार्यों की गति तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और भूमि से जुड़े विवादों के निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। यह पहल डिजिटल भारत की दिशा में एक सशक्त कदम मानी जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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