वकीलों ने बालू-गिट्टी के अंधाधुंध खनन को बताया हीटवेव का बड़ा कारण, छेड़ा आंदोलन

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वकीलों ने बालू-गिट्टी के अंधाधुंध खनन को बताया हीटवेव का बड़ा कारण, छेड़ा आंदोलन


बांदा, 22 मई (हि.स.)। पिछले एक सप्ताह से रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और हीटवेव की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अब भीषण तापमान के पीछे बालू और गिट्टी के अंधाधुंध खनन को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा है। लगातार देश के सबसे गर्म जिलों में शुमार हो रहे बांदा में पर्यावरणीय असंतुलन को लेकर चिंता सताने लगी है। इसी बीच नदियों और पहाड़ों में हो रहे बड़े पैमाने पर खनन के खिलाफ आवाजें तेज हो गई हैं और खनन पर रोक लगाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

शुक्रवार को जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त अजीत कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जनपद में जीवनदायिनी नदियों और पहाड़ों का व्यापक दोहन जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का प्रमुख कारण बनता जा रहा है।

ज्ञापन में कहा गया कि नदियों में भारी मशीनों और लिफ्टरों के जरिए बड़े पैमाने पर बालू निकाला जा रहा है, जबकि पहाड़ों पर विस्फोटकों का इस्तेमाल कर गिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते नदियों, पहाड़ों और जंगलों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में बांदा का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।

अधिवक्ता संघ ने जिले में बड़े स्तर पर पौधरोपण कराने और लगाए गए पौधों के संरक्षण की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि हरित क्षेत्र बढ़ाए बिना तापमान नियंत्रण संभव नहीं है।

इस दौरान जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक दीक्षित, शिवपूजन सिंह पटेल, विनोद सिंह सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।

जिला अधिवक्ता संघ ने नदियों, पहाड़ों और जंगलों को बचाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया है। संघ अध्यक्ष विमल कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही “नदियां बचाओ, पहाड़ बचाओ, जंगल बढ़ाओ” अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को जोड़ने और इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी की जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

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