नेपाल से रतन नाथ योगी की शोभायात्रा पहुंची शक्तिपीठ देवीपाटन

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नेपाल से रतन नाथ योगी की शोभायात्रा पहुंची शक्तिपीठ देवीपाटन


नेपाल से रतन नाथ योगी की शोभायात्रा पहुंची शक्तिपीठ देवीपाटन


नेपाल से रतन नाथ योगी की शोभायात्रा पहुंची शक्तिपीठ देवीपाटन


बलरामपुर, 23 मार्च (हि.स.)। चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नेपाल से आने वाले (पात्र देवता) पीर रतन नाथ देवता की भव्य शोभायात्रा शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर पहुंची। देवीपाटन मंदिर स्थित समय माता मंदिर पर पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी महाराज ने संतों के साथ पात्र देवता एवं नेपाली संतों का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। स्वागत के उपरांत नेपाल से आए मुख्य पुजारी द्वारा समय माता एवं मां पाटेश्वरी जी का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।

शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मार्ग पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु यात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह खड़े नजर आए और फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—मिल चौराहा, पुरानी बाजार, हनुमानगढ़ी चौराहा, लाल चौराहा एवं हरैया चौराहा—से होते हुए शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर पहुंची। मंदिर परिसर के समीप पहुंचने पर देवीपाटन पीठाधीश्वर द्वारा पात्र देवता का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। इसके उपरांत मुख्य पुजारी द्वारा विधि-विधान से मां पाटेश्वरी जी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।

बताया जाता है कि यह यात्रा युगों-युगों से चली आ रही प्राचीन परंपरा है। प्रत्येक वर्ष चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि को नेपाल के दांग-चौखड़ा क्षेत्र स्थित रतन नाथ योगी मंदिर से यह पैदल यात्रा देवीपाटन धाम पहुंचती है। मान्यता के अनुसार पंचमी से लेकर नवमी तिथि तक देवीपाटन मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी नेपाल से आए पुजारियों को सौंपी जाती है। इन पांच दिनों तक मंदिर की धार्मिक व्यवस्था नेपाली पुजारियों द्वारा संचालित की जाती है, जो मां पाटेश्वरी जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नेपाल के राजा रतन सेन ने महायोगी गुरु गोरक्षनाथ से दीक्षा प्राप्त करने के बाद उनका नाम रतन नाथ योगी पड़ा । कहा जाता है कि गुरु गोरक्षनाथ की आज्ञा से उन्होंने पाटन में शक्ति की आराधना करते हुए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां पाटेश्वरी ने वरदान दिया कि चैत्र नवरात्रि की पंचमी से नवमी तक उनकी पूजा रतन नाथ परंपरा से ही संपन्न होगी।

यह परंपरा भारत और नेपाल के बीच अटूट आस्था, सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। यात्रा के दर्शन-पूजन के लिए हजारों श्रद्धालु पूरे मार्ग में खड़े रहे। कई श्रद्धालु रात्रि से ही यात्रा के आगमन का इंतजार करते दिखाई दिए। हर वर्ष श्रद्धालुओं को इस पावन यात्रा का बेसब्री से इंतजार रहता है, जो क्षेत्र की गहरी आस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रभाकर कसौधन

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