चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की हताशा : प्रमिला पांडेय

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चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की हताशा : प्रमिला पांडेय


कानपुर, 28 सितंबर (हि.स.)। चुनाव में हार के बाद जनादेश स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा है। कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए, न कि हर हार के बाद निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर जनता को भ्रमित करना चाहिए। यह बातें महापौर प्रमिला पांडेय ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में कहीं।

महापौर ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्त डॉ. एसएस संधू व विवेक जोशी की बैठक के बाद स्पष्ट किया है कि एसआईआर समेत प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है।

जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर कांग्रेस ने अनावश्यक विवाद खड़ा किया। उन्होंने कहा कि संबंधित पत्र चुनावी नीति या आईटी प्रभाग से जुड़ा नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित था।

उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 को लेकर भी विपक्ष की ओर से भ्रम फैलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट एसआईआर के संदर्भ में फॉर्म-6 की प्रक्रिया को वैध ठहरा चुका है। निर्वाचन आयोग पात्र नागरिकों को मताधिकार दिलाने के लिए घर-घर जाकर प्रक्रिया पूरी कर रहा है।

महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं पर बिना तथ्य सवाल उठाने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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