पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने शुरू की शिक्षकों के अभिलेखों की जांच, फर्जी दस्तावेज पाए जाने पर होगी कार्यवाही

WhatsApp Channel Join Now
पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने शुरू की शिक्षकों के अभिलेखों की जांच, फर्जी दस्तावेज पाए जाने पर होगी कार्यवाही


जौनपुर, 26 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जौनपुर और गाजीपुर जनपदों के संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षणिक अभिलेखों के व्यापक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह जांच यूजी, पीजी, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों सहित बीएड, एमएड, बीबीए, बीसीए और एमसीए जैसे सभी संकायों के शिक्षकों पर लागू होगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन को मिली शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ शिक्षकों ने नियुक्ति के समय भ्रामक, अपूर्ण या संदिग्ध दस्तावेज प्रस्तुत किए। कुछ मामलों में एक ही शिक्षक के एक से अधिक महाविद्यालयों में अनुमोदन, संदिग्ध अनुभव प्रमाण पत्र तथा नेट/पीएचडी उपाधि के सत्यापन में अनियमितता की बात भी सामने आई है।

इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय ने दस्तावेजों का डिजिटल और भौतिक दोनों स्तरों पर मिलान कराने का फैसला किया है। वही इस मामले में गुरुवार को हिंदुस्थान समाचार प्रतिनिधि से बात करते हुए कुलसचिव केशलाल ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के तहत स्नातक एवं परास्नातक अंकपत्र, डिग्री प्रमाण पत्र, नेट/सेट योग्यता प्रमाण पत्र, पीएचडी उपाधि, शोध पंजीकरण अभिलेख, अनुभव प्रमाण पत्र तथा सेवा पुस्तिका की गहन जांच की जाएगी।साथ ही अनुमोदित विषय और विशेषज्ञता क्षेत्र का भी सत्यापन होगा।

सभी शिक्षकों को अपने योग्यता के प्रमाण पत्र समर्थ पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी है। जांच के दौरान संबंधित विश्वविद्यालयों, आयोगों और अधिकृत डिजिटल डेटाबेस से क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया जाएगा। यदि किसी शिक्षक द्वारा फर्जी या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, नियुक्ति प्रक्रिया में महाविद्यालय प्रशासन की भूमिका की भी जांच होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता तो नहीं हुई। नियुक्तियों में पारदर्शिता और मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

Share this story