मिलेट्स आधारित नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी : डॉ. सीमा सोनकर

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मिलेट्स आधारित नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी : डॉ. सीमा सोनकर


कानपुर, 30 मार्च (हि.स.)। छात्रों में नवाचार की भावना को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है और ऐसे मंच उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं। मिलेट्स आधारित उत्पाद न केवल पोषण से भरपूर हैं, बल्कि स्वरोजगार और उद्यमिता को भी प्रोत्साहित करते हैं। इस तरह के आयोजन छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक होते हैं। यह बातें सोमवार को खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की प्रभारी डॉ. सीमा सोनकर ने कहीं।

चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग द्वारा एमएसएमई कार्यक्रम के अंतर्गत वाईबेरेन्ट मिलेस्ट्स थीम पर क्षेत्रीय कॉन्क्लेव में विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस दौरान मिलेट्स (श्रीअन्न) आधारित विभिन्न पौष्टिक उत्पादों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

प्रदर्शनी में बाजरा लड्डू, कुकीज़, मफिन, रोज़ेला जैम, चटनी पाउडर और मोरिंगा चटनी पाउडर जैसे उत्पाद प्रमुख आकर्षण रहे। इन उत्पादों की गुणवत्ता, स्वाद और पोषण मूल्य की लोगों ने सराहना की। मिलेट्स आधारित खाद्य पदार्थ फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं, जो पाचन सुधारने, मधुमेह और मोटापे को नियंत्रित करने में सहायक हैं।

इस अवसर पर विभाग की छात्रा अलैशिका को उनके नवाचार “व्हिप शिप” के लिए एमएसएमई ट्रेड कॉन्क्लेव में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा सोनकर, डॉ. विनीता सिंह और डॉ. प्रज्ञा मिश्रा के मार्गदर्शन में हुआ।

कार्यक्रम में छात्राओं ने अपने उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया, लागत और लाभ के बारे में जानकारी दी। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से छात्रों में नवाचार, व्यावहारिक ज्ञान और उद्यमिता कौशल का विकास होता है, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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