कुलाधिपति के समक्ष महाविद्यालयों का प्रस्तुतीकरण, गुणवत्तापूर्ण व रोजगारपरक शिक्षा पर जोर

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गोरखपुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में जन भवन, लखनऊ में कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के समक्ष पीपीटी के माध्यम से अपने- अपने संस्थानों की उपलब्धियों, नवाचारों तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं का प्रभावशाली एवं विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।

इस अवसर पर कुलाधिपति ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए महाविद्यालयों को राष्ट्रीय एवं संस्थागत मूल्यांकन प्रक्रियाओं में सक्रिय एवं सार्थक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, कौशल एवं रोजगार क्षमता को विकसित करने का माध्यम बननी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने स्किल-ओरिएंटेड पाठ्यक्रमों, डिजिटल एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण तथा रोजगारपरक शिक्षा को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया।

राज्यपाल ने महाविद्यालयों को सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सजग रहते हुए सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का नियमित एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने की भी अपेक्षा व्यक्त की।

इस महत्वपूर्ण बैठक में 32 महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता करते हुए अपने-अपने संस्थानों की शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं नवाचार संबंधी गतिविधियों को प्रस्तुत किया। इनमें 21 वित्तपोषित (एडेड) तथा 11 राजकीय (गवर्नमेंट) महाविद्यालय सम्मिलित रहे, जिन्होंने विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता और गुणवत्ता संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कुलाधिपति एवं राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “ कुलाधिपति द्वारा दिए गए मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों को गुणवत्ता, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में नई दिशा प्राप्त हुई है। हम सभी उनके नेतृत्व में उच्च शिक्षा के मानकों को और अधिक ऊँचाई तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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