समाज में उपलब्ध संसाधनों काे साझा करना ही सामाजिक समरसता की पहचान : आनंदीबेन पटेल
राज्यपाल ने इलाहाबाद संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का उद्घाटन
प्रयागराज, 17 जुलाई (हि.स.)। समाज में उपलब्ध संसाधनों और अवसरों को साझा करने की भावना ही वास्तविक संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता की पहचान है। यह बातें शुक्रवार को इलाहाबाद संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं इलाहाबाद संग्रहालय समिति की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल ने कहीं।
उन्होंने कहा कि समाज में यदि किसी व्यक्ति के पास किसी वस्तु का अभाव है तो सहयोग और सहभागिता की भावना से उसकी आवश्यकता पूरी की जा सकती है। उन्होंने आत्मनिरीक्षण को जीवन की निरंतर प्रक्रिया बताते हुए सभी से स्वयं का नियमित मूल्यांकन करने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों को उसके भाव और अर्थ से परिचित कराने का आह्वान किया। साथ ही गुजरात की 'सुजलाम् सुफलाम्' नहर का उल्लेख करते हुए भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया
उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से आत्मनिरीक्षण, सहयोग और मानवीय मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने यह भी कहा कि साहित्य, संस्कृति और विरासत का संरक्षण नई पीढ़ी को अपने इतिहास और मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने शुक्रवार को इलाहाबाद संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का उद्घाटन करते हुए उसके पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश दिए, ताकि देश-दुनिया के अधिक से अधिक लोग इस अमूल्य साहित्यिक धरोहर से जुड़ सकें।
संग्रहालय पहुंचने पर राज्यपाल ने सर्वप्रथम अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने नव स्थापित साहित्यिक वीथिका का अवलोकन किया और वहां संरक्षित हिंदी साहित्य की दुर्लभ धरोहरों की जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने खड़ी बोली और अवधी की भाषायी विशेषताओं पर प्रकाश डाला तथा कविवर सुमित्रानंदन पंत से जुड़े ज्ञानपीठ सम्मान, स्मृति चिह्न एवं वाग्देवी की प्रतिमा का अवलोकन किया। उन्होंने सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की ऐतिहासिक कलम, परिधान तथा उनकी कृति 'आराधना' के तृतीय अध्याय का अध्ययन भी किया। पंत जी की प्रसिद्ध पंक्तियां न जाने नक्षत्रों से कौन, निमंत्रण देता मुझको मौन पढ़ते हुए उन्होंने उसका भावार्थ भी उपस्थित लोगों को समझाया। राज्यपाल ने निर्देश दिया कि साहित्यिक वीथिका का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए, जिससे हिंदी साहित्य की यह समृद्ध विरासत अधिक व्यापक स्तर पर उपलब्ध हो सके।
सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका में हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख रचनाकारों महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, हरिवंश राय बच्चन, नरेश मेहता, बालकृष्ण भट्ट, श्रीधर पाठक तथा प्रो. रामकुमार वर्मा सहित अनेक साहित्यकारों की दुर्लभ कृतियां, पत्र एवं साहित्यिक सामग्री संरक्षित की गई हैं।
राज्यपाल ने संग्रहालय की अनुभव वीथिका का भी अवलोकन किया, जिसे विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए विकसित किया गया है। संग्रहालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका पर आधारित कैटलॉग का विमोचन किया तथा विभिन्न दिव्यांग विद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं उनकी शिक्षिकाओं को बैग और आम के पौधे वितरित किए।
कार्यक्रम में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन एवं एनआरआई निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', जिलाधिकारी मनीष वर्मा, उपनिदेशक दिव्यांगजन कल्याण अभय कुमार श्रीवास्तव सहित अनेक अधिकारी, शिक्षाविद, साहित्यप्रेमी तथा संग्रहालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

