गोरखपुर में महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस के विरोध में सड़कों पर उतरी भाजपा

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गोरखपुर में महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस के विरोध में सड़कों पर उतरी भाजपा


गोरखपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश भर में चल रही राजनीतिक खींचतान अब गोरखपुर की सड़कों पर भी साफ नजर आने लगी है। लोकसभा में बिल के पारित न होने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में शहर के कचहरी चौराहा पर भाजपा महिला मोर्चा और भाजयुमो के बैनरतले जोरदार प्रदर्शन किया गया, जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला फूंका गया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “महिला विरोधी कांग्रेस” और “नारी सम्मान से खिलवाड़ नहीं सहेंगे” जैसे नारे लिखे पोस्टर दिखाई दिए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय अध्यक्ष अनिता गुप्ता ने कहा कि संसद में महिला आरक्षण बिल का पारित न होना देश की महिलाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने 17 अप्रैल को महिलाओं के इतिहास का “काला दिन” करार देते हुए कहा कि आधी आबादी इस दिन को कभी नहीं भूलेगी। उनके अनुसार, जब महिलाओं को उनका अधिकार देने का समय आया, तब कांग्रेस ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस महत्वपूर्ण बिल को आगे बढ़ने से रोक दिया।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर है। एक ओर वह खुद को महिला हितैषी बताती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाती। “नारी शक्ति इस अपमान का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी और आने वाले चुनावों में कांग्रेस को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।

प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। भाजयुमो के महानगर उपाध्यक्ष मनीष जैन ने विपक्षी दलों—खासतौर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस पर महिला आरक्षण बिल में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह बिल केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के सशक्तिकरण का मजबूत आधार है। इसे रोककर विपक्ष ने करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को आघात पहुंचाया है।

कचहरी चौराहा पर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब संसद से निकलकर जनता के बीच पहुंच चुका है और आने वाले समय में यह राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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