इंसान के ज्ञान और व्यवहार की बात करता है विज्ञान दर्शन : प्रो रवि कुमार मिश्र

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इंसान के ज्ञान और व्यवहार की बात करता है विज्ञान दर्शन : प्रो रवि कुमार मिश्र


प्रयागराज, 26 मई (हि.स)। हम महान भारतीय परम्परा से सम्बद्ध हैं। प्रत्येक व्यक्ति का जीवन दर्शन होता है। अंधविश्वास दुनिया को कहीं न कहीं प्रभावित करता है और दर्शन उसे शीतलता प्रदान करता है। विज्ञान का दर्शन-दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो वैज्ञानिक ज्ञान की प्रकृति, विधियों, मान्यताओं और उनके प्रभावों का अध्ययन करती है। विज्ञान दर्शन इंसान के ज्ञान और व्यवहार की बात करता है। हमारा ज्ञान भाषा के अधीन होता है। हम अपनी भाषा में जीवन के तमाम क्रिया कलापों को सम्पन्न करते हैं, इसलिए मानव जीवन में भाषा का बहुत महत्व है।

यह बातें ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, प्रयागराज में मंगलवार को समाजशास्त्र विभाग, नागरिक पीजी कॉलेज, जंघई, जौनपुर के प्रो0 रवि कुमार मिश्र ने बतौर मुख्य वक्ता कही। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांचवे स्टडी सर्किल के अंतर्गत “विज्ञान का दर्शन और सामाजिक शोध” विषय पर उन्होंने आगे कहा कि विज्ञान का दर्शन विज्ञान अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के उस अन्तरराष्ट्रीय नेटवर्क से है जो सीमाओं से परे जाकर मानव की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करता है। सामाजिक शोध एक निरन्तर प्रक्रिया है जिसमें तार्किकता, योजनाबद्धता एवं क्रमबद्धता पाई जाती है। जब यह शोध सामाजिक क्षेत्र में होता है तो उसे सामाजिक शोध कहा जाता है।

उन्होंने कहा, विज्ञान की दुनिया बहुत सम्मोहक होती है। उसका मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विज्ञान की एक आदर्शात्मक छवि होती है। विज्ञान का दर्शन अनुभववाद और आगमनवाद पर आधारित है। इस आधार पर सभी वैज्ञानिक ज्ञान का आधार संवेदी अनुभव और अवलोकन मानते हैं। वैज्ञानिक ज्ञान आखिरी नहीं है। विज्ञान व्यवस्थित प्रामाणिक और तार्किक ज्ञान है, जो अवलोकन और परीक्षणों के माध्यमों से प्राप्त किया जाता है।

प्रो0 मिश्र ने आगे कहा कि हाइपोथीसिस परिकल्पना और अवधारणा से निर्मित होती है। उन्होंने संकेत किया कि हाइपोथीसिस व्यक्ति को दिशा प्रदान करता है। उन्होंने ज्ञानमीमांसी अराजकता को महत्वपूर्ण तरीके से समझाने का प्रयास किया। अन्त में उन्होंने सामाजिक शोध में नैतिक मुद्दों पर संकेत करते हुए कहा कि नैतिक मुद्दे ज्ञान सिद्धांतों पर और नियमों को संदर्भित करते हैं जो शोधकर्ता को अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों की भलाई और गोपनीयता के परिणामों की स्पष्टीकरण है।

महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ मनोज दूबे ने बताया कि कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य डॉ शिखा श्रीवास्तव, संचालन शोध छात्रा आशी मिश्रा और आभार ज्ञापन कार्यक्रम की संयोजिका प्रो अमिता पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर कॉलेज के प्रो शिवहर्ष सिंह, डॉ अमरजीत राम, डॉ वेदप्रकाश मिश्रा, डॉ मानवेन्द्र वर्मा, डॉ रेफाक अहमद सहित शोधार्थी छात्र एवं छात्रायें उपस्थित रहीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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