माता-पिता के माहात्म्य का वर्णन सम्भव नहीं : प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी
-हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान की ओर से मातृ पितृ वंदन एवं आचार्य वंदन महोत्सव
प्रयागराज, 11 जनवरी (हि.स.)। सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी, जो पितु मातु बचन अनुरागी। तनय मातु पितु तोष निहारा, दुर्लभ जननि सकल संसारा। इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रयागराज की ओर से रविवार को माघमेला के लाल सड़क, दक्षिणी पटरी, परेड मैदान स्थित सेवा, संस्कार माघमेला शिविर में पारिवारिक मूल्यों के संवर्धन के निमित्त वृहद मातृ पितृ वंदन एवं आचार्य वंदन महोत्सव का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि संस्थान के अध्यक्ष एवं बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए बालकों को माता-पिता एवं गुरु की महिमा का सरस वर्णन किया। राम जैसे आदर्श को अपने अन्तःकरण में धारण करने की अपील की। कहा कि माता पिता के माहात्म्य का वर्णन सम्भव नहीं है।
कार्यक्रम में मूर्धन्य कथा प्रवक्ता गणेश द्विवेदी ने रामचरित मानस के विविध प्रसंग से अध्यात्म का आरोपण किया। वरिष्ठ प्रचारक और क्षेत्रीय संयोजक अमरनाथ ने कहा कि वह पुत्र अत्यधिक सौभाग्यशाली होता है, जिसके माता-पिता उससे प्रसन्न होते हैं।
इस मौके पर तमाम बच्चों ने माता-पिता और बहुओं ने अपनी सास का तिलक और पुष्पार्चन कर पूजन किया। बच्चे अपने माता पिता के श्रीचरणों का प्रच्छालन कर उनकी वंदना की। कार्यक्रम में सौ से अधिक बालक-बालिकाओं ने अपने श्रेष्ठ जनों का वंदन कर उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक संयोजक अमरनाथ, गंगा दत्त जोशी, नागेंद्र जायसवाल, संजय शुक्ला, हीरालाल भोला तिवारी, पार्षद आशीष कुमार द्विवेदी, अरुण दुबे, अनीता तिवारी, नन्हें लाल चौधरी, राजेश मिश्रा, यश विक्रम त्रिपाठी, अशर्फी सिंह, राम धीरज त्रिपाठी, पार्षद दीपिका पटेल, पूर्व पार्षद अलका श्रीवास्तव, मृदुल बाजपेयी, भाव्यांश अग्रवाल, सौरभ दुबे, मनीष द्विवेदी आदि शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन वंदना तिवारी ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

