कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव में पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा : जिलाधिकारी
कानपुर, 23 (हि.स.)। कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण अपनी पढ़ाई से वंचित न रहे, यह प्रशासन की प्राथमिकता है। पात्र बच्चों तक बाल सेवा योजना का लाभ पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है। यह बातें गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कही।
जब किसी बच्चे के सिर से माता-पिता का साया उठ जाता है, तो उसकी जिंदगी अचानक बदल जाती है। सपनों की उड़ान थमने लगती है और किताबों की जगह जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ जाता है। ऐसे कठिन दौर में कई बच्चों के लिए शिक्षा जारी रखना भी एक चुनौती बन जाता है।
इन्हीं नाजुक हालात में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर संचालित यह योजना उन बच्चों को सहारा दे रही है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखना चाहते हैं और आगे बढ़ने का हौसला नहीं खोते।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद कानपुर नगर में कुल 649 बच्चों को लाभान्वित किया गया, जिन पर लगभग 95.10 लाख रुपये की धनराशि व्यय की गई। यह दर्शाता है कि योजना जनपद में प्रभावी रूप से लागू है और जरूरतमंद बच्चों तक इसका लाभ समयबद्ध रूप से पहुंच रहा है।
योजना के लाभार्थी कल्याणपुर निवासी युवराज बहल इसका जीवंत उदाहरण है। माता-पिता के निधन के बाद उसकी पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया था, लेकिन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उसकी शिक्षा को फिर से पटरी पर ला दिया। अब युवराज नियमित रूप से विद्यालय जा रहा है और भविष्य में एक सम्मानजनक जीवन बनाने का सपना संजोए हुए है।
इसी तरह अनन्या धुरिया के जीवन में भी यह योजना नई उम्मीद लेकर आई। परिवार पर आई विपरीत परिस्थितियों के बीच उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, लेकिन योजना के सहारे अब वह बिना रुकावट अपनी शिक्षा जारी रखते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
योजना की पात्रता एवं प्रमुख शर्तें
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के अंतर्गत ऐसे बच्चे पात्र हैं, जिनके माता-पिता अथवा माता या पिता की मृत्यु एक मार्च 2020 के बाद हुई हो। लाभार्थी की आयु 18 वर्ष से कम तथा उत्तर प्रदेश का निवासी होना आवश्यक है। एक परिवार के अधिकतम दो बच्चों को योजना का लाभ दिया जाता है।
योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र बालक को प्रतिमाह 2500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उसके भरण-पोषण और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। आवेदन के बाद पात्रता की जांच कर लाभ स्वीकृत किया जाता है। यह योजना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उन बच्चों के सपनों को टूटने से बचाने का एक मजबूत प्रयास है, जिनके सामने जीवन ने समय से पहले कठिन चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास कुमार ने कहा कि यह योजना ऐसे बच्चों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है, जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है। पात्र बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें समयबद्ध रूप से योजना से जोड़ा जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

