निषाद पार्टी का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, उ प्र के चार प्रमुख क्षेत्रों में रैलियों का ऐलान
--निषाद पार्टी का यूपी में विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत का आधिकारिक शंखनाद
लखनऊ, 17 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में निषाद पार्टी ने अपने चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज़ करने की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी प्रदेश के चार प्रमुख क्षेत्रों पूर्वांचल के गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ में विशाल जनसभाओं का आयोजन करने जा रही है। इन रैलियों के माध्यम से निषाद पार्टी अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को मजबूती से उठाएगी।
निषाद पार्टी के जनसंपर्क अधिकारी राजीव यादव की ओर से मंगलवार को दी गई जानकारी के अनुसार, 22 मार्च 2026 को गोरखपुर जनपद स्थित महंत दिग्विजयनाथ पार्क में पार्टी की एक विशाल रैली का आयोजन प्रस्तावित है। यह रैली पार्टी के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत मानी गई है और इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, समर्थकों एवं निषाद समाज के लोगों की भागीदारी की अपेक्षा है। इस रैली को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ संजय निषाद सम्बोधित करेंगे।
उन्होंने बताया कि यह कदम आगामी चुनावों के दृष्टिगत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन रैलियों के माध्यम से पार्टी स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि वह पूरी तैयारी और मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है। विशेष रूप से पूर्वांचल, जो निषाद पार्टी का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र रहा है, वहां पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। वहीं मेरठ में रैली आयोजित कर पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरण स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत है।
इन जनसभाओं का मुख्य केंद्र बिंदु मझवार/तुरैहा समाज को अनुसूचित जाति (एससी) में परिभाषित किए जाने की मांग होगी। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मुद्दे को रैलियों में प्रमुखता से उठाते हुए इसे जनआंदोलन का रूप देने की रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि यह केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय है। बीते चार वर्षों में सत्ता में रहते हुए भी पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे को लगातार उठाया है और प्रदेश में दो बार “मछुआ एससी संवैधानिक अधिकार यात्रा” का आयोजन किया है। अब इन रैलियों के माध्यम से मझवार आरक्षण के मुद्दे को निर्णायक स्तर तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इन प्रस्तावित रैलियों के साथ-साथ निषाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक मजबूती को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 88 संगठनात्मक जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। यह निर्णय जमीनी स्तर पर संगठन को अधिक सक्रिय, संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय के साथ-साथ जनसंपर्क और चुनावी तैयारियों को भी नई गति मिलेगी।
इन रैलियों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन भी है। निषाद पार्टी इन आयोजनों के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि प्रदेश में उसका मजबूत जनाधार है और वह राजनीतिक समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखती है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और अन्य दलों के साथ संभावित गठबंधन एवं राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव पड़ेगा।
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक अंजनी निगम ने निषाद पार्टी की होने वाली रैलियों को लेकर बताया कि निषाद पार्टी का यह चुनावी आगाज़ केवल रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पूर्वांचल में मजबूत पकड़ और पश्चिम उत्तर प्रदेश में विस्तार की योजना के साथ पार्टी पूरे प्रदेश में स्वयं को एक सशक्त और निर्णायक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। आगामी चुनावों में इस रणनीति की सफलता प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

