अभिभावकों को घर पर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग के सिखाए जाएंगे आसान तरीके
बांदा, 14 सितंबर (हि.स.)। बुंदेलखंड के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने के लिए निपुण भारत मिशन को अब जनभागीदारी से आगे बढ़ाया जाएगा। गांव-गांव शिक्षा चौपाल आयोजित कर अभिभावकों को अभियान से जोड़ा जाएगा। उद्देश्य यह है कि स्कूल में पढ़ाई के साथ घर पर भी बच्चों को सीखने का अनुकूल माहौल मिले और कक्षा एक से तीन तक के बच्चे भाषा व गणित की बुनियादी दक्षताएं हासिल कर सकें।
निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को पढ़ने, समझने, लिखने और प्रारंभिक गणितीय अवधारणाओं में दक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अब इस अभियान में शिक्षकों के साथ अभिभावकों और ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिक्षा चौपाल आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और जालौन में कुल 6,277 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब 5.04 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विभाग का लक्ष्य इन बच्चों को निपुण बनाकर अधिक से अधिक विद्यालयों को निपुण विद्यालय के रूप में विकसित करना है।
शिक्षा चौपाल में बच्चों के माता-पिता के अलावा ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। यहां अभिभावकों को निपुण भारत मिशन की जानकारी देने के साथ बच्चों के सीखने का स्तर परखने के तरीके बताए जाएंगे। घर पर बच्चों के साथ पढ़ाई का अभ्यास कैसे कराया जाए, इसकी भी जानकारी दी जाएगी।
अभिभावकों को कहानी सुनाने, शब्द पहचानने, गिनती कराने और रोजमर्रा की चीजों के माध्यम से गणित समझाने जैसी आसान गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही बच्चों की नियमित विद्यालय उपस्थिति और स्कूल में उनके ठहराव को लेकर भी जागरूक किया जाएगा।
बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार खेती-किसानी और मजदूरी पर निर्भर हैं। अभिभावक सुबह से शाम तक काम में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए घर पर पर्याप्त समय देना कई परिवारों के लिए चुनौती बना रहता है। वहीं कुछ अभिभावक कम शैक्षिक पृष्ठभूमि के कारण यह भी नहीं समझ पाते कि बच्चे को किस स्तर की पढ़ाई और अभ्यास की जरूरत है।
शिक्षा चौपाल के जरिए इसी दूरी को कम करने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षकों के अनुसार शुरुआती कक्षाओं के बच्चों के लिए स्कूल में सीखी बातों का घर पर दोहराव बेहद जरूरी है। नियमित अभ्यास नहीं होने पर बच्चे सीखी हुई चीजें जल्दी भूल सकते हैं।
शिक्षा चौपालों के आयोजन के लिए ग्रामवार रोस्टर तैयार किया जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चौपालों का नियमित आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि अभिभावकों को अभियान से जोड़ने से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ बच्चों के सीखने के स्तर को भी मजबूती मिलेगी। इस संबंध में संतोष कुमार पांडेय, सहायक निदेशक, बेसिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल ने बताया कि गांव-गांव शिक्षा चौपाल के जरिए अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई से जोड़ा जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को ग्रामवार रोस्टर तैयार कर चौपालों का आयोजन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

